नितिन धीमान, अमृतसर : पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं की सारथी कहलाई जाने वाली डायल-108 में कार्यरत एक फार्मासिस्ट सुसाइड नोट लिखकर घर से खुदकुशी करने के लिए चला गया। सुबह करीब तीन बजे वह नहर के किनारे पुलिस को मिला। फार्मासिस्ट जोबन सिंह ने सुसाइड नोट में लिखा था कि कंपनी के अधिकारी उसे परेशान कर रहे हैं। जरूरी काम होने पर अवकाश नहीं दिया जाता। यहां तक कि उसकी पत्नी की डिलीवरी के दौरान भी उसका अवकाश मंजूर नहीं किया गया। सुसाइड नोट व मोबाइल घर पर छोड़कर वह निकल गया। सुसाइड नोट देखकर स्वजनों के होश फाख्ता हो गए। उन्होंने तुरंत उसके साथियों को फोन कर पूछा। इसी बीच पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांता चावला तक जानकारी पहुंची। उन्होंने एसएसपी देहाती गुरनीत सिंह खुराना व स्वास्थ्य सचिव हुसनलाल से बात की। इसके बाद जिला पुलिस की टीम उसकी तलाश में जुट गई। रात करीब तीन बजे फार्मासिस्ट संगतपुरा नहर के समीप मिला। पुलिस उसे थाने ले आई और फिर घर पहुंचाया। प्रो. चावला ने कहा कि शुक्र है ईश्वर का कि वह सकुशल मिल गया। जो बोलता है कंपनी उसे प्रताड़ित करती है

जोबन के अनुसार 14 जुलाई 2021 को वह पूर्व स्वास्थ्य मंत्री लक्ष्मीकांता चावला के साथ स्वास्थ्य सचिव हुसनलाल से मिले थे। सेक्रेटरी को अपनी परेशानी बताई कि कर्मचारियों को पांच महीने से साप्ताहिक अवकाश नहीं मिला। आठ की बजाय 12 घंटे ड्यूटी ली जा रही है। कर्मचारियों को 200 किलोमीटर दूर तक ट्रांसफर कर दिया जाता है। वेतन में कमी की बात भी रखी। बातचीत खत्म होने के बाद जब वह ड्यूटी पर लौटा तो जिला इंचार्ज गगन ने फोन करके कहा कि आपको 12 घंटे ही काम करना होगा। वह उसे टारगेट करने लगे। कंपनी द्वारा एंबुलेंस को सैनिटाइज भी नहीं करवाया जा रहा। एंबुलेंस से गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग व बीमारों को अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है। इससे तो हर मरीज संक्रमित हो जाएगा। मुझे भी प्रताड़ित किया : गगनदीप

डायल-108 के पूर्व कर्मचारी गगनदीप सिंह के अनुसार कंपनी ने उसे भी मानसिक प्रताड़ना दी थी। पिछले साल वह कोरोना संक्रमित हुआ। नियमानुसार वह होम क्वारंटाइन हो गया। कंपनी ने उस पर आरोप लगाया कि वह घर से बाहर जाता है। इसके बाद उसे मोहाली ट्रांसफर कर दिया। उसने दिसंबर 2020 में नौकरी छोड़ दी। 48 घंटे की ड्यूटी के बाद अवकाश पर चला जाता था जोबन: साकेत मुखर्जी

जिकित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड के स्टेट हेड साकेत मुखर्जी का कहना है कि कंपनी व सरकार के नियम के अनुसार कर्मचारियों से 12 घंटे ड्यूटी ली जाती है। फार्मासिस्ट जोबन 12 घंटे के बाद पुन: ड्यूटी ज्वाइन कर लेता था। 48 घंटे ड्यूटी कर रहा था। इसके बाद अवकाश पर चला जाता था। इसकी देखादेखी बाकी कर्मचारी भी ऐसा करने लगे थे। वैसे भी 12 घंटे की ड्यूटी में केवल चार घंटे ही काम करना पड़ता है। इसलिए उसे 12 घंटे ही नौकरी करने को कहा था, लेकिन वह नहीं माना और लगातार ड्यूटी करने की जिद करने लगा। वहीं उसकी पत्नी की डिलीवरी के समय जिला इंचार्ज ने अवकाश नहीं दिया तो इसकी हम जांच कर रहे हैं।