नितिन धीमान, अमृतसर

डेंगू जैसे जानलेवा रोग की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग जागरुकता का पैगाम दे रहा है, पर विभाग के अधिकारी व्यवस्था को बरकरार रखने में नाकाम साबित हो रहे हैं। बदलते मौसम में डेंगू मच्छर पूरी तरह परिपक्व होकर उड़ान भरने लगा है। दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में डेंगू पॉजिटिव मरीजों के उपचार का पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। गुरुनानक देव अस्पताल में बनाई गई डेंगू वॉर्ड में संदिग्ध बुखार से पीड़ित मरीजों के साथ-साथ आम बीमारियों से पीड़ित मरीजों को दाखिल किया गया है। एक ही वार्ड में रखे गए मरीजों को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि सरकारी अस्पताल में इलाज मिले न मिले, बीमारी तो बंटती है।

दरअसल, डेंगू पॉजिटिव अथवा संदिग्ध बुखार से पीड़ित मरीजों के लिए गुरुनानक देव अस्पताल में अलग से डेंगू वार्ड बनाई गई है। एक वार्ड में फीमेल तथा दूसरी में मेल पेशेंट को रखने का नियम है। बारिश के इस मौसम में डेंगू मच्छर अपने नुकीली चुभन से लोगों को तड़पाने को तैयार हो चुका है। गुरुनानक देव अस्पताल में हर रोज 15 से 20 मरीज संदिग्ध बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, जबकि 25 से ज्यादा मरीज डेंगू वार्ड में उपचाराधीन हैं।

डेंगू वार्ड में संदिग्ध बुखार से पीड़ित मरीजों के साथ-साथ आम बीमारियों से पीड़ित मरीज भी दाखिल हैं। हालांकि डेंगू एक ऐसा रोग है जो एक इंसान से दूसरे इंसान तक संक्रमण के जरिए नहीं पहुंचता, पर चिकित्सा विज्ञान में यह तथ्य स्पष्ट हो चुके हैं कि एडीज इंजिप्टी मच्छर यदि डेंगू पॉजिटिव मरीज को काट ले तो यह मच्छर भी डेंगू संक्रमित हो जाता है। इसके बाद यही मच्छर स्वस्थ मनुष्य को काटकर रोग ग्रसित करने में सक्षम हो जाता है। गुरुनानक देव अस्पताल में मच्छरों की भरमार है। यही मच्छर डेंगू पेशेंट को काटकर डेंगू बांटने में सक्षम हो जाएंगे। निश्चित ही इससे डेंगू की भयावहता बढ़ेगी, मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित ढंग से वृद्धि होगी।

डेंगू वार्ड में ऐसे कई पेशेंट दाखिल हैं जिनका रेपिड कार्ड टेस्ट करवाने के बाद डेंगू की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन्हें डेंगू पॉजिटिव नहीं मानता। विभागीय अधिकारियों के अनुसार रेपिड टेस्ट की रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं, हम सभी मरीजों का एलाइजा टेस्ट करवाएंगे।

बाक्स: अस्पताल प्रशासन को चेताया था

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आरटीआइ कार्यकर्ता रा¨जदर शर्मा राजू का कहना है कि मैंने अस्पताल प्रशासन को कई बार मच्छरों का सफाया करने की अपील की, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिस वार्ड में डेंगू का उपचार होना चाहिए, वहीं यह बीमारी बंटती हैं। डेंगू वार्ड में मच्छर, पर मच्छरदानी नहीं

डेंगू पेशेंट को नियमानुसार मच्छरदानी में रखा जाता है, ताकि मच्छर उसे काटकर डेंगू पॉजिटिव न बन जाए। दूसरी तरफ गुरुनानक देव अस्पताल की डेंगू वार्ड में मच्छरदानियों का प्रबंध नहीं हैं। सिर्फ बेडों पर लिटाकर मरीजों को ट्रीटमेंट देना उनके साथ मजाक नहीं तो और क्या है। बॉक्स. मैं कल ही अधिकारियों से बात करूंगा

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यह बहुत गंभीर मामला है। मैं कल ही गुरुनानक देव अस्पताल जाकर अधिकारियों से बात करूंगा। डेंगू वार्ड में सिर्फ डेंगू पेंशेंट ही होने चाहिए, अन्यथा लोगों को जागरूकता देने का क्या फायदा।

— डॉ. मदन मोहन

डिस्ट्रिक्ट एपिडिमोलॉजिस्ट अधिकारी

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