राजिदर सिंह, छेहरटा (अमृतसर)

कोट खालसा क्षेत्र में नशे की लत के कारण वीरवार की शाम सरबजीत सिंह (26) नाम के युवक की मौत हो गई। घटना के बाद सारे इलाके में मातम छा गया। हैरानी की बात यह है कि तीन साल पहले सरबजीत सिंह के बड़े भाई गुरजंट सिंह को भी नशे ने लील लिया था। अब दोनों बेटों की मौत के बाद कुलविदर कौर के जीने का सहारा कोई नहीं बचा।

कोट खालसा स्थित इंदिरा कॉलोनी निवासी कुलविदर कौर ने बताया कि काफी समय पहले उनके पति दलबीर सिंह की मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद वह अपने बड़े बेटे गुरजंट सिंह और छोटे बेटे सरबजीत सिंह के साथ परिवार चला रही थी। पति की मौत के बाद उसे यकीन था कि दोनों बेटे उसके बुढ़ापे की लाठी बनेंगे। लेकिन उसे पता नहीं था कि नशा उनके जवान बेटों की मौत का कारण बनेगा। कुलविदर कौर ने बताया कि चार साल पहले उसके बड़े बेटे गुरजंट सिंह को नशे की लत लग गई थी। वह चाह कर भी बेटे का नशा नहीं छुड़ा पाई। दो बार गुरजंट को नशा छुड़ाओ केंद्र में भी दाखिल करवाया गया। लेकिन नशेड़ी घर पर पहुंच कर गुरजंट को नशा दे जाते थे। लगभग तीन साल पहले गुरजंट सिंह की मौत हो गई। दो साल पहले नशे के सौदागरों ने उसके छोटे बेटे सरबजीत सिंह को भी नशे के जाल में फंसा दिया।

जिस बेटे को चाहिए था कि वह बूढ़ी मां के लिए कमा कर लाए। अब नशेड़ी बेटे को उसे पालना पड़ रहा था। वह तीन बार सरबजीत सिंह को नशा छुड़ाओ केंद्र में दाखिल करवा चुकी थी। लेकिन हर बार सरबजीत सिंह किसी ना किसी तरह वहां से निकलकर घर पहुंच जाता। उससे भी बर्दाश्त नहीं होता था कि उसका बेटा ज्यादा देर तक उससे दूर रहे। अब बेटे की नशे की लत उस पर हावी होने लगी थी। कुछ दिन पहले वह बेटे को घर पर छोड़कर उत्तरप्रदेश में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से मिलने गई थी। दस दिन पहले जब वह घर लौटी तो उसने देखा कि सरबजीत सिंह ने घर का सारा सामान बेचकर नशा कर लिया था। वह बेटे को समझा कर परेशान हो चुकी थी। वीरवार की शाम सरबजीत सिंह की एकाएक मौत हो गई। उधर, कोट खालसा थाना प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि उन्हें इस बाबत कोई शिकायत नहीं की गई। शिकायत आने पर ही वह कोई कार्रवाई कर सकते हैं।

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