नितिन धीमान, अमृतसर

स्वास्थ्य विभाग कोरोना संक्रमण से हुई मौतें का रिव्यू करने में जुटा है। 90 फीसद मौतों के कारणों की पड़ताल की जा चुकी है। अमृतसर में कोरोना संक्रमित 739 लोगों की जान गई है। इन मरीजों की मौत की वजह में यह सामने आया है कि इनमें से 90 फीसद यानि करीब 600 लोग तरह-तरह की बीमारियों से पीड़ित थे। ज्यादातर वो थे जो क्रोनिक डिजीज मसलन, किडनी रोग, लिवर रोग, हार्ट रोग के शिकार थे और कोरोना की चपेट में आए।

कोरोना संक्रमित होने के बावजूद ज्यादातर लोगों ने समय पर अपना टेस्ट नहीं करवाया। जब हालत बिगड़ने लगी तो गंभीर लक्षणों के साथ इन्हें अस्पताल तक पहुंचाया। कोरोना संक्रमण बीमारियों पर हावी हो गया। इनके फेफड़ों तक पहुंच चुका था। मल्टीपल आर्गन यानी शरीर के कई अंदरुनी अंगों ने काम करना बंद कर दिया।

दरअसल, डेथ रिव्यू के लिए पीसीएस आफिसर डा. ओबराय व स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों की टीम काम कर रही है। 90 फीसद मरीजों की मौत के रिव्यू में यह तथ्य साफ है कि कोरोना तो था, पर मौत की वजह सिर्फ कोरोना नहीं बल्कि संक्रमित होने पर समय पर इलाज न करवाने से वे मौत की आगोश में समा गए। खांसी जुकाम होने पर इन्होंने केमिस्ट या नजदीकी डाक्टर से दवा ली, पर कोविड टेस्ट नहीं करवाया। कोरोना वायरस इनके शरीर में पहले से शामिल बीमारियों में समाने लगा। यदि जल्दी स्वास्थ्य केंद्र में जाते तो ठीक हो सकते थे।

आज भी लोग जागरूक नहीं हैं। जिले के सरकारी एवं निजी अस्पतालों में बनाए गए कोरोना वार्डो में सिर्फ 39 प्रतिशत बेड पर ही कोरोना मरीज दाखिल हैं। यदि गंभीर बीमारियों से पीड़ित समय पर कोरोना टेस्ट करवाएं तो उनकी जिदगी बचाई जा सकती है। कोरोना मुक्त हुए मरीज भी लापरवाह, नहीं करवाते एंटी बाडी टेस्ट

कोरोना संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हुए लोग भी लापरवाही का प्रमाण दे रहे हैं। नि:संदेह, स्वस्थ हुए लोगों में कोरोना से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है, पर यह क्षमता किसी में अधिक तो किसी में बेहद कम होती है। उदाहरण के तौर पर 50 से अधिक आयु के लोगों में प्रतिरोधी क्षमता उच्च स्तर पर नहीं होती। ऐसे में कोरोना मुक्त हुए लोग पुन: संक्रमित भी हो रहे हैं। अब यह जरूरी है कि संक्रमण मुक्त हुए लोग अपना एंटी बाडी टेस्ट जरूर करवाएं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कितनी है।

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