नितिन धीमान, अमृतसर

मानवता की सेवा का संदेश लोगों के लिए महज दिखावा है। ऐसा ही मामला गुरु नानक देव अस्पताल (जीएनडीएच) में सामने आया। नवजात बच्ची को उसके अपने अस्पताल में छोड़कर चले गए। बेरहम मां ने बच्ची को जन्म जरूर दिया मगर आंचल में जगह नहीं दी। चार दिन की यह बच्ची जीवन के लिए मौत से जंग लड़ रही है। डाक्टर भरसक प्रयास कर रहे हैं कि उसकी सांसों की गति सहेज सकें, पर हालत बिगड़ रही है। दूसरा पुलिस प्रशासन भी इस बच्ची के दस्तावेज तैयार करने के लिए नहीं आ रहा।

दरअसल, चार दिन पूर्व इस बच्ची को कोई अज्ञात शख्स अस्पताल लेकर पहुंचा। उसने ओपीडी काउंटर से बच्ची की फाइल तैयार करवाई और उसे डाक्टर के पास ले गया। बच्ची की गंभीर हालत देखते हुए डाक्टर ने उसे तुरंत सीपेप मशीन में रखवा दिया। डाक्टरों का ध्यान बच्ची की ओर था। इसी बीच यह शख्स मौका देखकर वहां से निकल गया। नन्ही जान की सांसों की गति असामान्य है। उसका हृदय एक मिनट में 200 से अधिक बार धड़क रहा है। पीडिएट्रिक विभाग के डाक्टरों ने इस संबंध में अस्पताल में स्थित पंजाब पुलिस की गारद को सूचित किया। पुलिस नहीं दे रही रिलीविग, डाक्टर परेशान

डाक्टरों के अनुसार इस बच्ची की रिलीविग लेटर पुलिस की ओर से तैयार नहीं की जा रही। आमतौर पर अस्पताल में छोड़े गए बच्चों की रिलीविग लेटर पुलिस द्वारा तैयार की जाती है। डाक्टरों ने पुलिस को सूचित किया, पर तर्क मिला कि बच्ची के स्वजनों का रिकार्ड मुहैया करवाएं। बच्ची की हालत गंभीर है और डाक्टरों के अनुसार उसके बचने की संभावना कम है। यदि उसे कुछ हो जाता है तो पुलिस इसे हाथ नहीं लगाएगी। ऐसे में बच्ची को किसके हवाले करेंगे? सुजानपुर पठानकोट लिखवाकर चला गया शख्स

जो शख्स बच्ची को अस्पताल में लाया था उसने रिकार्ड में अपना नाम, पूरा पता और मोबाइल नंबर दर्ज नहीं करवाया। नियमानुसार स्टाफ को पर्ची काटने से पहले उपरोक्त सभी के अलावा शख्स का आधार कार्ड लेना चाहिए था। पर वह व्यक्ति सुजानपुर जिला पठानकोट लिखवाकर चला गया। डाक्टरों के पास रिकार्ड ही नहीं, कार्रवाई कैसे करें: पुलिस

जीएनडीएच में बनाई चौकी में कार्यरत मुंशी संजीव का कहना है कि बच्ची का कोई रिकार्ड अस्पताल में नहीं है। हम रिलीविग आर्डर किस बिनाह पर तैयार करें। जो शख्स बच्ची को छोड़ गया है, वह कौन है, उसका नाम, पता या मोबाइल नंबर तो हमारे पास हो। यह तीसरा मौका है जब अस्पताल में बिना आइडी प्रूफ के बच्ची को दाखिल किया गया है। संदेह : कुंवारी मां या दूसरी बेटी होने पर छोड़ा होगा

माना जा रहा है कि इस बच्ची को जन्म देने वाली कुंवारी मां होगी या फिर दूसरी बेटी होने पर परिवार ने इसे यहां छोड़ा होगा। क्योंकि कोई भी परिवार इस तरह बच्ची को नवजात और लावारिस नहीं छोड़ता। स्टाफ भी जिम्मेदार: पूरा नाम, पता, नंबर व आधार कार्ड लेते तो मिल जाते बच्ची का परिवार

दूसरा इसमें स्टाफ की भी लापरवाही है। पर्ची काटने वाले कर्मी ने उस व्यक्ति का पूरा पता, नाम, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड की कापी क्यों नहीं ली। अगर सब कुछ नोट किया होता तो बच्ची को अस्पताल में छोड़ने वाले और उसे जन्म देने वाले को पुलिस ढूंढकर तुरंत कार्रवाई कर सकती थी। मगर स्टाफ की गलती के कारण ऐसी नौबत आ गई है कि डाक्टर भी संकट में हैं। हालांकि वे उसका इलाज करते हुए अपना फर्ज निभा रहे हैं लेकिन बच्ची की हालत ठीक नहीं है।

Edited By: Jagran