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नितिन धीमान, अमृतसर

जिले के सरकारी अस्पतालों में एक बार फिर दवाओं का घोर संकट है। पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉरपोरेशन द्वारा संचालित वेयर हाउस से सरकारी अस्पतालों में दवाएं नहीं भेजी जा रहीं। इससे सिविल अस्पताल एवं गुरु नानक देव अस्पताल में कई जीवनरक्षक दवाओं की कमी खल रही है। इन दोनों अस्पतालों में कैल्शियम व आयरन जैसी सस्ती दवाओं का भंडार लगा है, लेकिन जीवन रक्षा में प्रयुक्त होने वाली कई महत्वपूर्ण दवाएं नहीं हैं। यहां तक कि सामान्य दर्द निवारक दवा तक मरीजों को नहीं मिल रही।

दरअसल, गुरु नानक देव अस्पताल में 284 प्रकार की दवाएं स्वीकृत हैं। ये दवाएं वेरका स्थित वेयर हाउस द्वारा ही अस्पताल की डिस्पेंसरी में उपलब्ध करवाई जाती हैं। दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन द्वारा वेयर हाउस से बार-बार दवाओं की मांग की जा रही है, मगर वेयर हाउस की ओर से 30 से 35 प्रकार की दवाएं ही भेजी जा रही हैं। ये दवाएं सामान्य बुखार एवं खांसी जुकाम की हैं, जो बाजार में 10 से 20 रुपये में मिल जाती हैं। हालात यह हैं कि गुरु नानक देव अस्पताल में ब्लड प्रेशर, शुगर, ऑर्थो, किडनी, हार्ट एवं स्किन से संबंधित दवाएं नहीं हैं। असल में इन बीमारियों की दवाएं बहुत महंगी हैं और सरकारी उदासीनता के चलते लोगों को निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। इस अस्पताल में ब्लड प्रेशर की एमलोडीपिन, शुगर की मेटफार्मिन, इंसुलिन, बच्चों के लिए पैरासिटामॉल सिरप, एंटी फंगल ट्यूब और दर्द निवारक फ्लेमर जेल एवं नेजल ड्रॉप भी नहीं है।

ठीक ऐसी ही स्थिति सिविल अस्पताल की है। सिविल अस्पताल की डिस्पेंसरी में 236 प्रकार की दवाएं उपलब्ध करवाने की सरकारी घोषणा की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सरकारी दवा ही मरीजों को लिखकर दें। विभागीय आदेश का पालन करते हुए डॉक्टर सरकारी दवाएं ही पर्ची पर लिख रहे हैं, पर डिस्पेंसरी में दवाओं की अनुपलब्धता के चलते मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों पर जेब ढीली करनी पड़ रही है।

सिविल अस्पताल में प्रतिमाह 30 हजार सीरिज का उपयोग होता है, जबकि वेरका स्थित वेयर हाउस की ओर से यहां से प्रतिमाह पांच से दस हजार सीरिज भेजी जा रही हैं। अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर सीरिज तो खरीद रहा है, पर दवाओं की खरीद करने में असमर्थ है। सिविल अस्पताल की गायनी वार्ड में भी दवाओं का अभाव है। यहां डी-स्पंज, एनिमा, सीरिज, नबिटालोल इंजेक्शन, मैग्निशियम सल्फेज इंजेक्शन, प्रिकॉशन किट्स तक नहीं। इसी प्रकार ऑर्थो विभाग से संबंधित सबसे से महत्वपूर्ण दर्द निवारक दवा डिक्लो पैरा भी वेयर हाउस की ओर से नहीं भेजी जा रही। वास्तविक स्थिति यह है कि सिविल अस्पताल में इलाज की सुविधा तकरीबन निशुल्क होने के कारण यहां मरीजों की संख्या भी अधिक है, पर इन्हें जब दवा नहीं मिलती तो सरकार को कोसते हुए दिखाई देते हैं। कुछ दवाएं आई हैं : एसएमओ सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. अरुण शर्मा का कहना है कि हमारा प्रयास रहता है कि मरीजों को हर प्रकार की दवा अस्पताल में ही मिले, लेकिन वेयर हाउस से दवाओं का स्टॉक पूरा न आने के कारण परेशानी होती है। शनिवार को ही वेयर हाउस से दवाओं का स्टॉक भेजा गया है। सोमवार को स्टॉक की जांच करने के बाद ही पता चलेगा कि कितनी दवाएं आई हैं और कितनी नहीं। सेक्रेट्री ने मांगी दवाओं की सूची गुरुनानक देव अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. जगदेव सिंह कुलार का कहना है कि हम वेयर हाउस को दवाओं की सूची भेजते हैं, लेकिन वहां से कुछेक दवाएं ही हमें मिलती हैं। इस संबंध में मैंने मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग के सेक्रेट्री डीके तिवारी से बात की थी। उन्होंने मुझसे उन दवाओं की सूची मांगी है जो अस्पताल में नहीं हैं। यह सूची उन्हें भेज दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही दवाओं का स्टॉक हमें मिलेगा।

Posted By: Jagran

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