हरदीप रंधावा, अमृतसर: शहर के पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के मकसद से नगर निगम और जिला प्रशासन अपने स्तर पर समय-समय पर कई कदम उठाता रहता है। पर्यावरण को बचाना समय की जरूरत भी है। इसी के तहत अब नगर निगम के कमिश्नर कम डिप्टी कमिश्नर हरप्रीत सिंह सूदन व संयुक्त कमिश्नर (जेसी) ने संयुक्त रूप से विचार-चर्चा करके शहर में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) की बसें बायो गैस के जरिए चलाने की योजना बनाने की तरफ कदम बढ़ाया है। यह शहरवासियों के साथ-साथ नगर निगम के लिए भी लाभकारी होगा। बता दें कि पर्यावरण को बचाने व हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से इस बार निगम ने मानसून सीजन में जुलाई में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। फिर वह इनकी एक साल तक देखभाल भी करेगा। सात सदस्यीय कमेटी चर्चा करके सौंपेगी रिपोर्ट

नगर निगम के संयुक्त कमिश्नर (जेसी) हरदीप सिंह ने बताया कि शहर में कुल 92 बीआरटीएस की बसें हैं। इसमें से 84 बसें चल रही हैं। उन्होंने बताया कि 31 किलोमीटर के रूट पर 45 बस स्टापेज हैं। बायो गैस से बसें चलने से नगर निगम को वित्तीय लाभ होगा। निगम को सवा करोड़ के करीब हर महीने बीआरटीएस की बसों पर डीजल के रूप में खर्च करने पड़ते हैं। बायोगैस के प्रोजेक्ट को सफल बनाने के मकसद से निगम सहित बीआरटीएस के अधिकारियों की सात सदस्यीय कमेटी गठित हुई है। इसमें बायोगैस प्रोजेक्ट संबंधी विचार-विमर्श करके 15 दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। बायो गैस प्रोजेक्ट के साथ-साथ पंप भी लगाए जाएंगे

शहर के विभिन्न हिस्सों से एकत्रित किए जाने वाले कूड़े-कर्कट में से गीले कूड़े के साथ साथ गोबर से गैस बनाने के लिए प्रोजेक्ट लगेंगे। भगतांवाला डंप के साथ-साथ डेयरी कांप्लेक्स व सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पर बायो गैस प्रोजेक्ट के साथ-साथ पंप लगाए जाएंगे, क्योंकि वहां से पैदा होने वाली गैस को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) में तबदील करके ही इस्तेमाल में लाया जाएगा। 50 बसों पर सीएनजी की किट लगाएंगे तो दस दिन में पैसे हो जाएंगे पूरे

नगर निगम शहर के विभिन्न हिस्सों से कूड़ा करकट तो एकत्रित कर ही रहा है। अब उन्हें शहर से बाहर बनाई गई डेयरियों से गोबर भी एकत्रित करेगी जबकि एक बीआरटीएस की बस में सीएनजी किट लगानी पड़ती है, तो लगभग 25 हजार रुपये की यह किट लगाई जाएगी। अगर 50 बसों पर पर भी यह किट लगाई जाती है तो 25 हजार के हिसाब से 12.50 लाख रुपये की लागत आएगी। इस तरह निगम के ये पैसे दस दिनों में ही पूरे हो जाएंगे।

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