अमृतसर, [नवीन राजपूत]। अमेरिका से डिपोर्ट होकर अमृतसर भेजे गए अलकायदा आतंकी इब्राहिम जुबेर मोहम्मद के बारे में खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों को भी अचरज में डाल दिया है और वे उसका रिकार्ड खंगालने में जुट गई हैं। खुलासा हुआ है कि वह अलकायदा के लिए फंड जुटाता था। मूल रूप से हैदराबाद का रहने वाले इब्राहिम जुबेर के भारत में संपर्क की भी जांच की जा रही है। अमृतसर मेडिकल कॉलेज के क्‍वारंटाइन सेंटर में भर्ती जुबेर से उससे पूछताछ करने राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की टीम भी पहुंच गई है। सुरक्षा और जांच एजेंसियां भारत में इब्राहिम जुबेर के नेेटवर्क का पता लगाने में जुट गई हैं।

आतंकी इब्राहिम जुबेर से पूछताछ करने के लिए एनआइए की टीम भी पहुंची अमृतसर

इब्राहिम जुबेर मोहम्‍मद को अमृतसर मेडिकल कालेज में क्वारंटाइन सेंटर में अमेरिका से आए सभी यात्रियों से अलग रखा गया है। सुरक्षा एजेंसियां इब्राहिम सहित उसके रिश्तेदारों और करीबियों का रिकार्ड खंगालने में जुटी हैं। एसीपी सरबजीत सिंह ने बताया कि उस पर पुलिस लगातार नजर रख रही है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका द्वारा डिपोर्ट किए गए 167 भारतीयों के साथ इब्राहिम जुबेर बीते मंगलवार को अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचा था।

मेडिकल कॉलेज के क्वारंटाइन सेंटर में इब्राहिम को अलग रखा गया, पुलिस की कड़ी चौकसी

खुफिया एजेंसियों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इब्राहिम जुबेर के हैदराबाद में रहने वाले पुराने दोस्तों पर भी नजर रखी जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि साल 2015 में अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआइ द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद वह भारत में रहने वाले अपने किन सगे-संबंधियों के संपर्क में था? बताया जा रहा है कि एनआइए की टीम भी अमृतसर पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में एनआइए के अलावा आइबी के अधिकारी भी इब्राहिम जुबेर से पूछताछ कर सकते हैं।

हैदराबाद में रहने वाले उसके पुराने दोस्तों पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर

हैदराबाद निवासी इब्राहिम जुबेर मोहम्मद पेशे से इंजीनियर 2002 में अमेरिका चला गया था। उसकी मुलाकात अमेरिका में ही खतरनाक आतंकी संगठन अल कायदा के सदस्यों से हुई। इब्राहिम जुबेर को अमेरिका आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने पर दोषी करार दे चुका है।

जानकारी के अनुसार, जुबेर ओहियो स्टेट की राजधानी कोलंबस में पढ़ाई कर रहा था। इसी दौरान वह आतंकी संगठन अलकायदा के संपर्क में आ गया था। इसके बाद वह अरब देशों में भी गया था। वर्ष 2006 में उसने एक अमेरिकी युवती से शादी कर ली थी। इसी दौरान उसने आतंकी संगठन की आर्थिक शाखा का काम देखना शुरू किया था। इस दौरान उसका भाई फारुख मोहम्मद भी अमेरिका चला गया था और अनवर नसीर नाम के प्रचारक के संपर्क में था।

साल 2011 में अमेरिका द्वारा आतंकी ठिकानों पर ड्रोन से किए हमले में अनवर की मौत हो गई थी। अमेरिकी एजेंसी की जांच में सामने आया था कि मोहम्मद फारुक नसीर के लिए फंडिंग का काम करता था। अमेरिकी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट ने उसे आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहने के जुर्म में 27 साल की सजा सुनाई।

इस बीच अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने इब्राहिम के संबंध अलकायदा के साथ पाए थे। खुलासा हुआ कि आतंकी संगठन के लिए फंड जुटाता है। अमेरिकी पुलिस ने साल 2015 में इब्राहिम जुबेर को भी धर लिया था। साल 2019 में उसे पांच साल की सजा सुनाई गई थी।

अब खुफिया एजेंसियों की जांच से इब्राहिम की भारत में गतिवि‍धियों व संपर्क सूत्रों पर बड़ा खुलासा होने की संभावनाएं जताई जा रही है। इसके लिए सुरक्षा एवं जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुट गई हैं कि अमेरिेका जाने के बाद उसका भारत में किन-किन लोगों से संपर्क रहा। वह यहां किस तरह से अपना संपर्क बनाए हुए था इसको भी खंगाला जा रहा है। पूरे मामले में जांच से देश मेंं आतंकी नेटवर्क को फैलाने की साजिश को लेकर भी अहम जानकारी मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

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