Asha Bhosle हिंदी नहीं, पंजाबी दिलों पर भी राज करती थीं; 'नानक नाम जहाज...' से मिली थी अमर पहचान
महान गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने पंजाबी गीतों और शबद गायन में ...और पढ़ें

AI से तैयार की गई आशा भोसने की तस्वीर।
HighLights
आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन।
पंजाबी संगीत और शबद गायन में गहरा योगदान।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
अनुज शर्मा, अमृतसर। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 12 अप्रैल 2026 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। आशा भोसले ने अपने लंबे करियर में हिंदी सहित कई भाषाओं में हजारों गीत गाए, लेकिन पंजाबी संगीत के साथ उनका विशेष और गहरा संबंध रहा।
आशा भोसले ने पंजाबी फिल्म उद्योग में कई लोकप्रिय गीत गाए, जिन्होंने उन्हें इस क्षेत्र में भी एक अलग पहचान दिलाई। उन्होंने मशहूर गायक मोहम्मद रफी और महेंद्र कपूर के साथ कई यादगार ड्यूट गीत गाए।
उनके प्रसिद्ध पंजाबी गीतों में “ढोल वजदा ताली वजदी”, “कनका नूं लग गया”, “बुल तेरे पतले”, “आ गई रुत सावन दी” और “मेरी सूती दी” शामिल हैं, जिन्हें आज भी श्रोता बड़े चाव से सुनते हैं।
पंजाबी संगीत में उनकी सफलता के पीछे कई दिग्गज संगीतकारों का योगदान रहा। खास तौर पर हंसराज बहल ने उन्हें शुरुआती दौर में मौका दिया और विभिन्न रागों की बारीकियां सिखाईं। इसके अलावा उन्होंने एस. मोहिंदर, सरदूल सिंह क्वात्रा और रवि जैसे संगीतकारों के साथ भी काम किया और कई यादगार रचनाएं दीं।
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शबद गायन में दिखा सादगी का अनोखा मेल
आशा भोसले का योगदान केवल फिल्मी गीतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने शबद गायन में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। उनका गाया “नानक नाम जहाज है” शबद आज भी श्रद्धा और भक्ति के साथ सुना जाता है। उनकी आवाज में आध्यात्मिक गहराई और सादगी का अनोखा मेल देखने को मिलता था।
उनके करियर की शुरुआत भी बेहद संघर्षपूर्ण रही। वर्ष 1948 में संगीतकार हंसराज बहल ने उन्हें फिल्म ‘चुनरिया’ में गाने का अवसर दिया, जिससे उनके संगीत सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी मेहनत से संगीत की दुनिया में ऊंचा मुकाम हासिल किया।
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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दुख जाहिर किया
जहां उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर को ‘भारत की कोयल’ कहा जाता था, वहीं आशा भोसले ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से हर शैली में खुद को साबित किया। पंजाबी, हिंदी, भक्ति और लोक संगीत—हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इंटरनेट मीडिया पर संदेश लिख शोक व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा-
"प्रसिद्ध गायिका और 'पद्म विभूषण' से सम्मानित आशा भोसले जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उनके जाने से संगीत के क्षेत्र में एक सुनहरे युग का अंत हो गया है; यह संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। भारतीय संगीत में उनके द्वारा दिए गए अमूल्य योगदान को सदियों तक याद रखा जाएगा। शोक संतप्त परिवार और उनके असंख्य प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि वह दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और परिजनों को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। वाहेगुरु वाहेगुरु"
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