विपिन कुमार राणा, अमृतसर: पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी आखिरकार शिरोमणि अकाली दल का हिस्सा बन गए। पार्षद अमन ऐरी, भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विक्की ऐरी व पूर्व पार्षद प्रभजीत रटौल सहित उन्होंने चंडीगढ़ में शिअद ज्वाइन की। इन नेताओं के अलावा जोशी कुनबे के तमाम नेता पंडाल में हाजिर रहे। भाजपा ने जोशी के जाने से पार्टी को हुए नुकसान को नकारते हुए कहा कि भाजपा कैडर बेस पार्टी है। किसी नेता के आने जाने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होता।

जोशी को 10 जुलाई 2021 को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया गया था। 35 साल तक भाजपा का हिस्सा रहे जोशी ने किसानी मुद्दों को लेकर भाजपा को अलविदा तो कह दिया है, पर विधानसभा हलका उत्तरी में बतौर शिअद प्रत्याशी उनकी राहें आसान नहीं है। 1951 से लेकर आज तक हलके में मुख्य मुकाबला कांग्रेस बनाम भाजपा में रहा है और पहली बार इस हलके में अकाली दल मैदान में उतर रहा है। हलके में कांग्रेस और भाजपा का अच्छा खासा कैडर वोट है। ऐसे में जोशी के लिए उनके वोट कैडर में सेंधमारी करना बड़ी चुनौती होगी। वह अकाली दल को कितने वोट अपने बूते पर दिलवा पाते हैं, यह समय ही बताएगा। वैसे शिअद और बसपा के बीच हुए समझौते में उत्तरी हलके की टिकट बसपा के खाते में जा चुकी है। ऐसे में इसका समाधान कैसे होता है, यह भी आने वाले दिनों में देखने लायक रहेगा। रात से ही स्टेट्स डालने कर दिए थे शुरू

जोशी के शिअद में जाने की संभावनाओं के बीच उनके साथ पिछले दस सालों में हलके से जुड़े और भाजपा के प्राथमिक सदस्य बने वर्करों ने वीरवार देर रात से ही इंटरनेट मीडिया पर स्टेटस डालना शुरू कर दिया था कि वह पार्टी की जन विरोधी नीतियों की वजह से प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे है। हालांकि इसमें भाजपा जिला या प्रदेश कार्यकारिणी का कोई बड़ा पदाधिकारी शामिल तो नहीं था, पर बड़ी तादाद में पिछले 14 सालों से उनके अंगसंग रहे वर्कर शुरू शामिल हैं। तस्वीर अधूरी थी, आज पूरी हो गई

जोशी के बहुत खास रहे भाजपा के पूर्व प्रवक्ता एडवोकेट आरपी सिंह मैणी ने आठ नवंबर 2020 को अकाली दल का थामन थाम लिया था। जोशी के निष्कासन के बाद मैणी ने फेसबुक पर स्टेटस डाला था कि 'स्वतंत्र होने पर बहुत बहुत बधाई'। वीरवार रात को उन्होंने स्टेटस डाला कि 'तस्वीर अधूरी थी, आज पूरी होगी' -शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने पर मेरे भाई अनिल जोशी और उनके साथियों को बहुत बहुत बधाई। अब भाजपाई खेमे में दावेदारी को लेकर शुरू हुई जोरअजमाइश

जोशी के शिअद में जाते ही भाजपाई खेमे में भी उत्तरी हलके की दावेदारी को लेकर जोर अजमाइश शुरू हो गई है। हलके में राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक जहां प्रबल दावेदारों में से एक हैं, जोशी को जब पार्टी ने साइड लाइन किया था, तब से ही मलिक हलके में सक्रिय हैं। इसके अलावा पूर्व पार्षद अनुज सिक्का, पूर्व महासचिव सुखमिदर सिंह पिटू जहां पार्टी टिकट के दावेदार हैं, वहीं जिला प्रधान सुरेश महाजन भी इसी हलके से पार्टी की टिकट चाहते हैं। हाईकमान करेगी उत्तरी हलके की सीट का फैसला : बसपा

बहुजन समाज पार्टी के राज्य अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने कहा कि भाजपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी अपने साथियों के साथ अकाली दल में शामिल हुए हैं, यह अच्छी बात है। जोशी ने पहले मीडिया के समक्ष कहा था कि वह नार्थ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। परंतु अकाली-बसपा गठजोड़ के तहत अमृतसर नार्थ की सीट बसपा को अलाट हुई है। इस सीट पर क्या अकाली दल का उम्मीदवार अब चुनाव लड़ेगा या इस सीट को बसपा-अकाली दल के साथ किसी अन्य सीट के साथ बदलेगी, इसका फैसला अकाली दल और बसपा का राष्ट्रीय नेतृत्व लेगा। जो भी फैसला होगा, वह पार्टी के प्रत्येक वर्कर को मंजूर होगा। जोशी के जाने से कोई फर्क नहीं : भाजपा

भारतीय जनता पार्टी के प्रधान सुरेश महाजन ने कहा कि भाजपा राष्‌र्ट्रीय पार्टी है, जिसने दो सीटों से लेकर देश में राज करने का सफर किया है। ऐसे में जोशी आदि के जाने से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता। हमारा कैडर हमेशा ही पार्टी को समर्पित रहा है और पार्टी उसी कैडर के बूते पर देशभर में खड़ी है। मौकापरस्त लोग मौका देखकर इधर-उधर जाते है, इसका पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता। जोशी के प्लस प्वाइंट

-अकाली भाजपा सरकार में दस सालों तक हलके में किए गए विकास कार्य।

-लोगों के साथ सीधा संपर्क और उनके काम करवाने की पाजिटिव अप्रोच।

-टीम वर्किंग हमेशा ही उनकी ताकत रही है और उनका शुमार अच्छे चुनाव मैनेजरों में आता है।

-गठबंधन सरकार में हुए विकास कार्यों की वजह से जोशी दस साल तक एक ब्रांड के रूप में जाने जाते रहे। जोशी के नेगेटिव प्वाइंट..

-विधानसभा हलका उत्तरी में कांग्रेस और भाजपा का अच्छा खासा कैडर वोट है।

-उत्तरी हलका चाहे अकाली दल ने बसपा को कोटे में दिया है, पर बसपा का भी बहुत ज्यादा वोट बैंक वहां नहीं है।

-जोशी को 2007 और 2012 में विजयी दिलवाने वाली ज्यादातर टीम उनका साथ छोड़ चुकी है।

-हिदू वोट बैंक क्योंकि सब में विभाजित होगा, ऐसे में जोशी के लिए वोटें जुटाना चुनौती होगी।

Edited By: Jagran