संवाद सहयोगी, अमृतसर

एसजीपीसी प्रधान गो¨बद ¨सह लोंगोवाल की ओर से जस्टिस रणजीत ¨सह आयोग रिपोर्ट को बिना एसजीपीसी जनरल हाउस की मंजूरी के ही सिरे से खारिज करने के नतीजन एसजीपीसी विवादों में घिर गई है। इससे न सिर्फ एसजीपीसी, पंजाब सरकार बल्कि गर्मख्यालियों के निशाने पर भी आ गई है, इसे लेकर सरकार व गर्मख्याली संगठनों ने प्रधान लोंगोवाल को घेरना शुरु कर दिया है। इसी सिलसिले के तहत बीते दिन दरबार-ए-खालसा ने एसजीपीसी प्रधान लोंगोवाल के नाम पदाधिकारियों को एसजीपीसी मुख्यालय के बाहर शोक पत्र दिया था। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को शिअद (अमृतसर) के पदाधिकारियों ने पार्टी प्रवक्ता हरबीर ¨सह संधू की अगुवाई में रोष पत्र एसजीपीसी पदाधिकारी विजय ¨सह को सौंपा।

संधू ने सौंपे रोष ज्ञापन में कहा है कि एसजीपीसी श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के दोषियों को सजा दिलाने की बजाए उन्हें बचाने में जुटी हुई है। उन्होंने खुलासा किया कि एसजीपीसी ने रणजीत ¨सह आयोग द्वारा इसे विधानसभा में पेश किए जाने से पहले ही विरोध करना शुरु कर दिया था, जबकि दोषियों को सामने लाने में एसजीपीसी को इस आयोग को सहयोग देना चाहिए था। प्रधान लोंगोवाल ने रिपोर्ट पढ़े बिना ही इस संबंधी एसजीपीसी हाउस में प्रस्ताव लाए बिना ही इसे खारिज कर दिया था। यह सिख सिद्धांतों , परम्पराओं व एसजीपीसी नियमों का घोर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही गुरमीत राम रहीम ¨सह के चेले गिरफ्तार हो सके हैं। उन्होंने प्रधान लोंगोवाल से रिपोर्ट को रद करने के चलते सिख कौम से माफी मांगने, बरगाड़ी में लगाए गए मोर्च का समर्थन कर बनती जिम्मेदारी निभाने की मांग की है। ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके।

मक्कड़ और ढींढसा भी कर चुके हैं विरोध

गौर हो कि इसे लेकर एसजीपीसी के पूर्व प्रधान अवतार ¨सह मक्कड़ व शिअद बादल महासचिव सुखदेव ¨सह ढींढसा भी विरोध जता चुके हैं। उन्होंने भी इसके लिए शिअद बादल हाईकमान व एसजीपीसी की भूमिका की ¨नदा की है।

Posted By: Jagran