जागरण संवाददता, अमृतसर: जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. इंद्रमोहन गुप्ता पर रिश्वत के आरोप लगाने वाले दुकानदार अब पीछे हट गए हैं। दुकानदार ने शिकायत वापस ले ली है। हालांकि रिश्वत प्रकरण की जांच के लिए चंडीगढ़ से आई फूड विभाग की टीम दुकानदारों के बयान लेकर लौट चुकी है। दुकानदार ने टीम को बयान दिया था कि डीएचओ ने उनसे 16 हजार रुपये रिश्वत के रूप में लिए।

नारायणगढ़ में करियाने की दुकान चलाने वाले कर्मजीत सिंह ने अब स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर साफ किया है कि 11 जून को उन्होंने हलफिया बयान के माध्यम से यह जानकारी दी थी कि डीएचओ डा. इंद्रमोहन गुप्ता ने उनसे रिश्वत ली, मुझे धमकाया। यह शिकायत अब मैं बिना किसी दबाव के वापस ले रहा हूं। इसके अतिरिक्त 14 जून को चंडीगढ़ से संयुक्त कमिश्नर मनोज खोसला को जो बयान मैंने दिए थे उसके आधार पर अब कोई कार्रवाई नहीं करवाना चाहता।

कर्मजीत वही शख्स है जिसने डीएचओ पर रिश्वत लेने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। अब अचानक वह नर्म क्यों पड़ गया, इसके पीछे भी राजनीतिक कारण बताया जा रहा है। बहरहाल, एक तरफ शिकायत का हलफिया बयान, दूसरी तरफ शिकायत वापस लेने का पत्र देकर दुकानदार स्वयं फंस सकता है। कर्मजीत ने मीडिया के सामने कहा था कि डीएचओ ने सैंपल की जांच न करने की एवज में उससे रिश्वत ली। यदि उसने गलत आरोप लगाया था तो इससे विभाग की छवि धूमिल हुई है। ऐसे में चंडीगढ़ की टीम कर्मजीत के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।

कर्मजीत द्वारा शिकायत वापस लेने वाले पत्र में गवाह के तौर पर वार्ड नंबर 81 की पार्षद सुनीता शर्मा की मुहर एवं हस्ताक्षर हैं। इधर, सिविल सर्जन डा. चरणजीत सिंह का कहना है कि यह मामला अब चंडीगढ़ में विचाराधीन है। जांच टीम ही किसी निष्कर्ष तक पहुंच सकती है।

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