जेएनएन, अमृतसर। 1947 में भारत-पाक के बीच अटारी सीमा पर 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि जहां ड्रम रख कर गेट बनाया गया था, वहां अब देश का सबसे लंबा और मजबूत गेट लगाए जाने का काम अंतिम चरण में है। 90 के दशक में यहां लगाए गए लोहे के गेट का आकार साल 1998 में बढ़ाया गया था और अब इसकी लंबाई को और बढ़ाया जा रहा है। यह गेट 51 फीट लंबा और 60 किलोग्राम वजन का होगा।

अंतरराष्ट्रीय बिल्डर्स कंपनी हेमकुंट बिल्डर्स वर्क ऑर्डर हासिल करने के गेट लगाए जाने की जिम्मेदारी भल्ला इंजीनियर्स वर्क्स को सौंपी है। कंपनी के आठ एक्सपर्ट पिछले एक सप्ताह से लगातार काम कर रहे हैं। उधर, पाकिस्‍तान की ओर से भी ऐसा ही गेट लगवाया जा रहा है।

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दोनों तरफ से लोग देख सकेंगे रिट्रीट

इन गेटों का डिजाइन ऐसा है कि दोनों तरफ के लोग बीएसएफ और पाकिस्‍तानी रेंजर्स के बीच रोजाना शाम को होने वाली रिट्रीट सेरेमनी को आसानी से देख सकेंगे। हेमकुंट बिल्डर्स के पार्टनर बलदेव सिंह कहते हैं कि यह गेट माइल्ड स्टील से तैयार किया गया है और यह सामान्य स्टील से बहुत ज्यादा मजबूत है। आठ दिन पहले माहिरों को इस काम पर लगाया गया और  गेट स्थापित किए जाने का काम अंतिम चरण में है। मंगलवार शाम तक इसे लगा दिया जाएगा।

गेट तैयार करने में जुटे कारीगर।

गेट की खासियत

-माइल्ड स्टील से तैयार किया गया।

-गेट की ऊंचाई 14 फीट और लंबाई करीब 51 फीट है।

-60 क्विंटल वजनी गेट को बनाने पर 22 से 25 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान।

-पहले यहां आर्क टाइप का लोहे के गेट था, जो करीब 12 फीट लंबा था।

-पुराने गेट की ऊंचाई मध्य में 10 फीट थी, जबकि साइड में यह 6 फीट ऊंचा था।

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2015 में एनआरआइ ने तोड़े थे बैरियर

17 नवंबर, 2015 को सुरिंदर सिंह कंग नामक एक एनआरआइ  ने अपनी तेज रफ्तार स्पोट्र्स गाड़ी से सीमा पर सभी बैरियर तोड़ भारतीय गेट को क्षतिग्रस्त कर दिया था। अब इसीके स्थान पर यहां नया गेट लगाया गया।

अटारी बॉर्डर पर 1958 में बनाई गई थी पुलिस चौकी

वर्ष 1958 में भारत-पाक सीमा अटारी पर एक छोटी सी पुलिस चौकी स्थापित की गई, जो आज भी काहनगढ़ पुलिस चौकी के नाम से मौजूद है। तब यहां पर पुलिस हर आने-जाने वाले से पूछताछ करती थी। वर्ष 1965 में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स की स्थापना के साथ ही यहां पर सुरक्षा की जिम्मेदारी बीएसएफ को सौंप दी गई और बीएसएफ और पाक रेंजर्स के बीच रोजाना शाम को रिट्रीट सेरेमनी का सिलसिला शुरू किया गया।

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By Sunil Kumar Jha