अमृतसर [नितिन धीमान]। जेल में गुनाहों की सजा भुगत रहे कैदियों पर 'काला साया' मंडरा रहा है। अमृतसर की केंद्रीय जेल में बंद 3600 कैदियों में से 2000 कैदी काला पीलिया का शिकार पाए गए हैं। इनमें से अधिकांश कैदी नशेे के आदी भी हैं। जेल प्रशासन ने कैदियों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग की मदद मांगी है।

दरअसल, पिछले कुछ समय से कैदियों को भूख न लगना, वजन कम होना, बुखार, कमजोरी, उल्टी, पेट में पानी भर जाना, खून की उल्टियां होना, रंग काला होने लगना, पेशाब का रंग गहरा होना इत्यादि शारीरिक समस्याएं आ रही थीं। जेल के डॉक्टरों की दवाई भी इन कैदियों पर कारगर साबित नहीं हुई। ऐसी स्थिति में जेल प्रशासन ने सिविल सर्जन कार्यालय को पत्र लिखकर कैदियों की चिकित्सकीय जांच करवाने का आग्रह किया।

सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने जेल में जाकर कैदियों की जांच की। डॉक्टरों ने प्रथम दृष्टया जांच में यह पाया कि 2000 कैदी काला पीलिया यानी हैपेटाइटिस-सी का शिकार हैं। इन कैदियों का एचसीवी टेस्ट किया गया, जिसमें 2000 कैदियों में काला पीलिया होने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने पूरी तरह आश्वस्त होने के लिए कैदियों का सैंपल लिया और वायरल लोड टेस्ट भी करवाया। वायरल लोड टेस्ट लैब की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 2000 कैदी काला पीलिया से ग्रस्त हैं।

डॉक्टरों ने कैदियों की रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय में जमा करवाई। स्वास्थ्य विभाग ने इन कैदियों के उपचार का निशुल्क प्रबंध किया है। हालांकि इस बीमारी का इलाज काफी महंगा है और सिविल अस्पताल में आम मरीजों का भी इलाज किया जा रहा है, ऐसे में सिविल अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिख दवाओं का अतिरिक्त स्टॉक भी मंगवाया है। दवा का कोर्स पूरा होने पर पुन: इन कैदियों का वायरल लोड टेस्ट होगा। इसके बाद ही इन्हें रोग से मुक्ति का सर्टिफिकेट मिलेगा। इनमें अधिकतर कैदी हत्या, चोरी, नशा तस्करी, लूटपाट सहित अन्य कई मामलों में सजा काट रहे हैं।

इंजेक्टेबल ड्रग की लत ने बनाया काला पीलिया का शिकार

सेहत विभाग के सूत्रों के अनुसार कैदियों में काला पीलिया फैलने का एक बड़ा कारण नशा माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से पुलिस द्वारा नशा तस्करों एवं नशे की लत का शिकार लोगों की धरपकड़ के बाद अदालत के आदेश उन्हें जेल में भेजा जा रहा है। पकड़े जाने से पहले एक ही सीरिंज से नशे का प्रयोग करने वाले अपराधी ही इस रोग का शिकार बन रहे हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि जेल की सलाखों के पीछे पहुंचने से पहले कैदी नशा पूर्ति के लिए एक ही सीरिंज का इस्तेमाल कर रहे हैं। असल में काला पीलिया रोग का प्रसार इंजेक्शन या संक्रमित खून के जरिए एक से दूसरे इंसान में होता है। जेल में नशा कैसे पहुंचता है, इस बात की पुष्टि एवं प्रमाणिकता देने को कोई तैयार नहीं।

प्रतिदिन पांच कैदियों को सिविल अस्पताल भेज रहा जेल प्रशासन

जेल प्रशासन की ओर से प्रतिदिन पांच कैदियों को सिविल अस्पताल में भेजकर ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। ये पांच वो कैदी हैं जिन्हें काला पीलिया ने बुरी तरह जकड़ रखा है। कैदियों की बढ़ती संख्या के चलते अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर दवाओं का अतिरिक्त स्टॉक मंगवाया है।

नियमित रूप से जांच की जा रही है: एसएमओ

सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. राङ्क्षजदर अरोड़ा कहते हैं कि आमतौर पर जब सीरिंज को पूरी तरह भरकर एक से अधिक लोग ड्रग लेते हैं तो काला पीलिया होने की आशंका प्रबल हो जाती हैं। बहरहाल, स्वास्थ्य विभाग ने कैदियों को दवा उपलब्ध करवा दी है। इनकी नियमित रूप से जांच भी की जा रही है।

जेल में नशे जैसी कोई बात नहीं

केंद्रीय जेल की डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट हिम्मत शर्मा ने कहा कि जिेल में कैदी नशे का सेवन नहीं कर रहे। काला पीलिया का शिकार मरीज जेल कब और किस हाल में आए, इस बारे में जानकारी नहीं है। हो सकता है कि ये कैदी पहले से ही नशे का सेवन करते रहे हों। क्योंकि जेल में मालवा बेल्ट के भी कई कैदी हैं तो हो सकता है कि दूषित पेयजल के सेवन से वे इस बीमारी का शिकार बने हों।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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