जींद, [कर्मपाल गिल]। कांग्रेस के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता रणदीप सिंह सुरजेवाला को हरियाणा के जींद उपचुनाव में उतारकर पार्टी ने राजनीतिक पंडितों को हैरानी में डाल दिया। चर्चा शुरू हो गई कि आखिरकार कैथल से विधायक होने के बावजूद उन्हें जींद के मैदान में क्यों उतारा गया। पूरे मामले में जानकार इसके पांच प्रमुख कारण मान रहे हैं जिससे कांग्रेस ने यह दांव खेला है।

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ओर से प्रमोद सहवाग, बलजीत रेढू, कर्मवीर सैनी, सुरेश गोयत टिकट के प्रबल दावेदार थे। प्रमोद सहवाग ने जींद हलके के गांवों का भी दौरा कर लिया था। शहर में भी उन्होंने डोर-टू-डोर प्रचार कर रखा था। वह अपनी टिकट को पक्का मानकर चल रहे थे। ऐन मौके पर रणदीप सुरजेवाला को टिकट थमा दिया। राजनीति के जानकार रणदीप को टिकट देने के पीछे पांच बड़े कारण मानते हैं।

पहला गुटबाजी रोकना
हरियाणा कांग्रेस में पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष डॉ. अशोक तंवर, रणदीप सिंह सुरजेवाला, कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई के अलग-अलग गुट हैं। इनमें से किसी भी गुट के समर्थक नेता को टिकट मिलता तो ये सभी नेता कभी एकजुट न होते। सुरजेवाला जब नामांकन करने पहुंचे तो सभी नेता एक मंच पर आ गए। यहां तक की नामांकन करने भी पहुंचे। कांग्रेस आलाकमान ऐसा कोई रास्‍ता ढ़ूंढ़ रहा था कि हरियाणा कांग्रेस के सभी नेता एक मंच पर आए और यह उसे सुरजेवाला की उम्‍मीदवारी से होता नजर आया।



दूसरा कारण: भाजपा को रोकने की उम्‍मीद
भारतीय जनता पार्टी ने नगर निगम के मेयर चुनाव में जबर्दस्त जीत हासिल की है। भाजपा अब जींद उपचुनाव में जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है। इस उपचुनाव में जीत का असर अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। इसलिए कांग्रेस ने भाजपा का मुकाबला करने के लिए रणदीप सुरजेवाला जैसे दिग्‍गज को मैदान में उतारा। उसे लगा कि रणदीप जैसे नेता के सहारे वह यह उपचुनाव जीत लेगी और कांग्रेस के लिए इससे हरियाणा में एक माहौल बनेगा। 

तीसरा कारण: चौटाला परिवार से मुकाबला
इनेलो से अलग होने के बाद अजय चौटाला व दुष्यंत चौटाला ने जींद को ही अपनी कर्मभूमि घोषित किया है। सांसद दुष्यंत चौटाला दावा करते हैं कि नौ महीने बाद जींद से ही प्रदेश की सरकार चलेगी। ऐसे में चौटाला परिवार को टक्कर देने के लिए भी कांग्रेस में सुरजेवाला को छोड़कर दूसरा कोई नेता नजर नहीं आया। इससे पहले भी सुरजेवाला और ओमप्रकाश चौटाला की चुनावी जंग बेहद चर्चित रही थी।



चौथा कारण: जाट कार्ड खेलना
भाजपा ने उपचुनाव में सबसे पहले पंजाबी कार्ड खेलते हुए कृष्ण मिड्ढ़ा को मैदान में उतार दिया था। पहले गैर जाट उम्‍मीदवार को मैदान में उतारने का मन बना रही कांग्रेस को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा। इसके बाद पार्टी ने जाट नेता को टिकट देने का फैसला किया। निर्दलीय विधायक जयप्रकाश जेपी के बेटे विकास सहारण को मैदान में उतारने पर प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष डॉ. अशोक तंवर की सहमति न होने के कारण राहुल गांधी ने सुरजेवाला को प्रत्याशी बनाने का फैसला सुना दिया।

पांचवां कारण: कांग्रेस का अस्तित्व बचाने की कोशिश

जींद में 2005 के बाद कांग्रेस का अस्तित्व ही खतरे में था। 2009 और 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारी थी। 2014 में तो कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई थी। ऐसे में कांग्रेस को कम से कम यहां अपनी पकड़ तो मजबूत करनी ही है। कमजोर प्रत्‍याशी की वजह से प्रदेश की राजनीतिक राजधानी जींद से पूरे प्रदेश में बहुत बड़ा नकारात्‍मक संदेश जाता।


फोटो कैप्‍शन

रणदीप बी - एक मंच पर सभी नेता। अलग-अलग गुटों के नेता रणदीप के साथ एकजुट हुए।

रणदीप ए - अलग-अलग गुटों में बंटी कांग्रेस के सभी धुरंधर नेता रणदीप का नामांकन करने पहुंचे

रणदीप - रणदीप सुरजेवाला

Posted By: Sunil Kumar Jha