कोलकाता, आनन्द राय। पश्चिम बंगाल विधानसभा का चुनाव 2021 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों की सरगर्मी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस राज्य में अपनी तीसरी पारी खेलने के लिए बिसात बिछा रही है, जबकि लोकसभा चुनाव में कड़ी टक्कर दे चुकी भाजपा उसकी राह रोकने में जुट गई है। सत्ताधारी तृणमूल और भाजपा की लड़ाई में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद मुसलमीन (एआइएमआइएम) ने तड़का लगा दिया है। तीन तरफ से शुरू हुई यह रार मिशन 2021 की बुनियाद बन रही है। उधर, राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी सरकार की खामियां गिनाने का कोई मौका चूक नहीं रहे हैं।

तृणमूल प्रमुख व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर तीखे तीरों की बौंछार के साथ ही ओवैसी को भाजपा की बी टीम और दलाल कहकर दोहरा मोर्चा खोल दिया है। यह दोतरफा लड़ाई नए समीकरण की बुनियाद बन रही है। दरअसल, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा, वीरभूम, उत्तर व दक्षिण 24 परगना, और उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर समेत कुछ इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी भूमिका है। ओवैसी की पार्टी ने बंगाल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। जाहिर है कि इससे तृणमूल के जनाधार में सेंधमारी होगी। ओवैसी का बंगाल में भले कोई जनाधार नहीं है, लेकिन सभी सीटों पर चुनाव लड़कर वह वोटों के बिखराव का सबब बनेंगे। दो बार सत्ता हासिल करने में मुस्लिम मतदाता ममता के सहयोगी रहे हैं।

एनआरसी का मुद्दा तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से ही टकराव का अहम बिंदु बना है। भाजपा अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह एक अक्टूबर के कोलकाता दौरे में एनआरसी को लेकर अपना रुख साफ कर गए थे। गत दिवस उन्होंने राज्यसभा में पूरे देश में एनआरसी लागू करने की बात कही तो ममता ने यह कहने में तनिक भी देर नहीं कि वह बंगाल में एनआरसी लागू नहीं होने देंगी। ममता ने इस तेवर से एक खास वर्ग को साधने की मुहिम शुरू की है। दूसरी तरफ, हिंदू चरमपंथी और मुस्लिम अतिवाद का मुद्दा उठाकर वह लोकसभा चुनाव में हुई क्षति की भरपाई करने की कोशिश भी कर रही हैं।

ध्यान रहे कि लोकसभा चुनाव के दौरान ममता ने जय श्रीराम के नारे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और उसका उन्हें कुछ खास लाभ नहीं मिला। इसीलिए उन्होंने हिंदू चरमपंथियों के साथ मुस्लिम अतिवाद पर तेवर दिखाकर बात बराबर करने की पहल की है। लोकसभा चुनाव में भाजपा 18 सीटों पर विजयश्री हासिल कर चुकी है। अगर ओवैसी का पश्चिम बंगाल में उभार हुआ तो इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा। इसीलिए ममता भाजपा के साथ ही ओवैसी पर भी हमलावर हैं।

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Posted By: Sachin Mishra

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