कोलकाता, जागरण संवाददाता। Citizenship Amendment Act: नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को पुरुलिया में सड़क पर उतरीं और इस मुद्दे पर तमाम विपक्षी दलों से भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। ममता ने कहा कि झारखंड से भाजपा को मुंहतोड़ जवाब मिला है और एक साल के अंदर भाजपा के हाथ से निकलने वाला झारखंड पांचवां राज्य बना है।

पुरुलिया के मानभूम विक्टोरिया इंस्टीट्यूशन से टैक्सी स्टैंड तक चार किलोमीटर की पदयात्रा शुरू करने से पहले मंच से सभा को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि नए कानून को लेकर अल्पसंख्यकों में भय है, वहीं एनआरसी के बहाने उन्हें नागरिकता से बेदखल करने की साजिश चल रही है। सभी राजनीतिक दलों व नागरिक संगठनों से कहूंगी कि वे एकजुट हों। यह जनता का आंदोलन है और आजादी की दूसरी लड़ाई है। जो दूसरों को भगाना चाहते हैं, असल में देश में उनके लिए कोई जगह नहीं है।

सुनिश्चित करें मतदाता सूची में सबका नाम

ममता ने कहा कि बंगाल में पहले ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का अद्यतन बंद किया जा चुका है। अभी मतदाता सूची का काम चल रहा है। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा-'आप सिर्फ इतना सुनिश्चित कीजिए कि आपका नाम मतदाता सूची में हो। बाकी का काम मैं देख लूंगी।' राज्य में एनआरसी नहीं लागू होने देने के वायदे को दोहराते हुए उन्होंने कहा-'जब तक मैं जीवित हूं, किसी को भी देश नहीं छोड़ना पड़ेगा। बंगाल में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनेगा। जो भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा है, उसे राष्ट्र विरोधी बताया जा रहा है लेकिन जब तक सीएए को वापस नहीं लिया जाता, तब तक मैं अपना विरोध खत्म नहीं करुंगी।'

छात्रों से छीना जा रहा विरोध करने का अधिकार

ममता ने सीएए के खिलाफ देशभर में छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा था कि यह कैसे हो सकता है कि वे 18 साल की उम्र में सरकार चुनने के लिए मतदान तो करें, लेकिन उन्हें विरोध करने का अधिकार न दिया जाए। छात्र काले कानून का विरोध क्यों नहीं कर सकते? केंद्र सरकार प्रदर्शकारी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और उन्हें विश्वविद्यालयों से निष्कासित कर रही है।

पदयात्रा से पुरुलिया में खोई जमीन हासिल करने की जुगत में ममता

सीएए के खिलाफ कोलकाता में 11 दिनों में पांच बार पदयात्रा कर चुकीं ममता जब सोमवार को पुरुलिया की सड़कों पर उतरीं तो उनके साथ राज्य के चार मंत्री शुभेंदु अधिकारी, मलय घटक, शांतिराम महतो और संध्यारानी टुडू भी थे। जुलूस की शुरुआत मानभूम विक्टोरिया इंस्टीट्यूशन से हुई, जो बीटी सरकार रोड, जिला स्कूल मोड़, जलखाना मोड़, हाट मोड़, नीलकुठी डांगा, राधाकृष्ण होते हुए टैक्सी स्टैंड में जाकर समाप्त हुआ। इसमें बड़ी संख्या में तृणमूल समर्थकों के साथ आम लोग भी शामिल हुए। राजनीतिक जानकार पदयात्रा को आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले तृणमूल की ओर से पुरुलिया में खोई जमीन हासिल करने की जुगत मान रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ममता ने लोकसभा चुनाव के दौरान भी पदयात्रा को जनसंपर्क का जरिया बनाया था। इस दौरान वे पार्टी उम्मीदवारों के साथ लगातार पैदल मार्च में शामिल होती थीं।

 

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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