जम्मू, राज्य ब्यूरो।  केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में छह सहयोग संकल्पों के साथ जल शक्ति और आपदा प्रबंधन पर काम किया जाएगा। इसके लिए दोनों केंद्र शासित प्रदेश और तमिलनाडु सरकार मिलकर काम करेंगे। एक-दूसरे के बेहतर कार्यो से सीख लेकर आगे बढ़ा जाएगा। जल शक्ति और आपदा प्रबंधन पर आयोजित कान्फ्रेंस में इस छह सूत्रीय कार्यक्रम में सहयोग संकल्प पर बात बनी है।

केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार और जन शिकायत विभाग, तमिलनाडु सरकार और जम्मू कश्मीर सरकार के सहयोग से आयोजित रीजनल कान्फ्रेंस के समापन समारोह में रविवार को सहयोग संकल्प जारी किया गया। आपदा प्रबंधन विभाग के आयुक्त सचिव पीके पोले ने सहयोग संकल्प पढ़ा। उप राज्यपाल के सलाहकारों फारूक खान और केके शर्मा समापन समारोह में शामिल हुए।

सलाहकार शर्मा ने कहा कि इस कान्फ्रेंस से तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख के बीच तकनीकी विशेषज्ञों का आदान प्रदान हो सकेगा। आपदा प्रबंधन का बेहतर ढांचा कायम करने में मदद मिलेगी। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में तमिलनाडु ने काफी बेहतर काम किए हैं जिसे जम्मू कश्मीर में अपनाया जा सकता है। एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत पर्यटन, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग से काम किया जा सकता है।

सलाहकार फारूक खान ने कहा कि आपदा प्रबंधन की समय पर जानकारियां एक दूसरे को पहुंचाने से जान माल का नुकसान होने से बचाया जा सकता है। कान्फ्रेंस में जम्मू कश्मीर के अधिकारियों को काफी कुछ सीखने का मौका मिला है। वे भविष्य में आपदाओं से निपटने में सक्षम होंगे। केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार और जन शिकायत विभाग के अतिरिक्त सचिव वी श्रीनिवास ने स्वागत भाषण में कांफ्रेंस के विभिन्न सत्रों बारे जानकारी दी।

सहयोग संकल्प के ये हैं बिंदु1.

एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत अनेकता में एकता को बढ़ावा देते हुए जल शक्ति और आपदा प्रबंधन पर सूचना का आदान प्रदान किया जाएगा।

2. जल शक्ति और आपदा प्रबंधन से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए मिलजुल कर काम होगा। इसके लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

3. जल शक्ति और आपदा प्रबंधन पर साल भर रीजनल कान्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। चेन्नई में 2020 में कान्फ्रेंस होगी जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख के अधिकारी जल शक्ति और आपदा प्रबंधन पर हुई प्रगति की जानकारी देंगे।

4. बारिश का पानी बचाने, पानी की खपत, शहरों में बाढ़ रोकने और नदियों के संरक्षण पर तकनीकी विशेषज्ञों का आदान प्रदान होगा।

5. जल शक्ति और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में लंबी अवधि की योजनाएं बनाई जाएंगी और इसके लिए एमओयू पर सरकारों के बीच हस्ताक्षर होंगे।

6. कान्फ्रेंस में विशेषज्ञों की सलाह पर दस्तावेज तैयार करने के लिए सरकारें आपस में सहयोग करेंगी और जल शक्ति और आपदा प्रबंधन पर न्यूनतम सरकार और अधिकतम सुशासन पर विशेष प्रकाशन किया जाएगा। 

Posted By: Preeti jha

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