जम्मू, जागरण संवाददाता : तवी नदी से अवैध खनन को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह पर संगीन आरोप लगाने वाले पूर्व एमएलसी एवं प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के सचिव विक्रम रंधावा ने शुक्रवार को डा. जितेंद्र सिंह से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगी। विक्रम रंधावा ने कहा कि वह बहक गए थे और कुछ लोगों के बहकावे में आकर उन्होंने डा. जितेंद्र सिंह पर बेबुनियाद आरोप लगा दिए। रंधावा ने कहा कि तीन मई की अपनी पत्रकार वार्ता में उन्होंने जो भी आरोप लगाए, बाद में खुद ही उनकी जांच करने पर निराधार साबित हुए। रंधावा ने कहा कि वह अपनी इस भूल के लिए डा. जितेंद्र सिंह से माफी मांगते हैं।

विक्रम रंधावा ने शुक्रवार दोपहर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए डा. जितेंद्र सिंह से माफी मांगी। रंधावा ने कहा कि वह अपने कहे शब्दों के लिए बहुत शर्मिंदा हैं और डा. जितेंद्र सिंह व उनके परिवार को लेकर उन्होंने जो शब्द कहे थे, उसके लिए डा. जितेंद्र सिंह के परिवार से भी माफी मांगते हैं। रंधावा ने कहा कि वह अपना लिखित माफीनामा डा. जितेंद्र सिंह को भेज रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि डा. जितेंद्र सिंह उन्हें इस गलती के लिए माफ कर देंगे। रंधावा ने कहा कि वह लिखित में दे रहे हैं कि भविष्य में वह कभी भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई बात नहीं कहेंगे।

यह था पूरा मामला : तवी नदी से अवैध खनन को लेकर भाजपा प्रदेश सचिव एवं पूर्व एमएलसी विक्रम सिंह रंधावा ने तीन मई को अपने निवास पर एक संवाददाता सम्मेलन कर केंद्रीय मंत्री डा. जितेंद्र सिंह पर संगीन आरोप लगाए थे। रंधावा ने डा. जितेंद्र सिंह व उनके परिवार को लेकर अपशब्द कहते आरोप लगाया था कि डा. जितेंद्र सिंह ने जम्मू में खनन माफिया खड़ा किया है और उनके इशारे से खनन विभाग स्टोन क्रशर्स वालों से पैसे वसूल कर रहे हैं। रंधावा ने कहा कि जो लोग पैसे नहीं देते, उनके खिलाफ विभाग गैर-कानूनी ढंग से कार्रवाई करता है और यह सब डा. जितेंद्र सिंह के कहने पर हो रहा है। रंधावा ने डा. जितेंद्र सिंह पर अपने एजेंट सक्रिय करके पैसों की उगाई करने का आरोप लगाया था।

डा. जितेंद्र ने किया है मानहानि का दावा

पूर्व एमएलसी विक्रम रंधावा के आरोपों को निराधार करार देते डा. जितेंद्र सिंह ने कुछ दिन पश्चात ही रंधावा के खिलाफ दिल्ली की कोर्ट में एक करोड़ रुपये की मानहानि का केस दर्ज करवाया था। डा. जितेंद्र सिंह की ओर से उनके वकील जीवीश नागरथ ने यह केस दायर किया था। वकील ने दलील दी कि डा. जितेंद्र सिंह भारत के एक सम्मानित नागरिक है और उनकी बेदाग छवि को धूमिल करने के लिए बेबुनियाद आरोप लगाए गए है। डा. जितेंद्र सिंह को 2014 में ऊधमपुर-कठुआ संसदीय क्षेत्र के लोगों ने अपना सांसद चुना और उनकी मेहनत व जन-समर्पन को देखते हए लोगों ने 2019 में एक बार फिर उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना।

डा. जितेंद्र सिंंह इस समय प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री है और पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह कर रहे हैं। लिहाजा उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसे निराधार आरोप लगाए गए। इससे पूर्व डा. जितेंद्र सिंह की ओर से रंधावा को कानूनी नोटिस जारी किया गया था, जिसमें विक्रम रंधावा से कहा गया था कि वह डा. जितेंद्र सिंह पर लगाए बेबुनियादी, झूठे व निराधार आरोप तत्काल वापस लें और सार्वजनिक रूप से इसके लिए माफी मांगें। ऐसा न होने की सूरत में उनके खिलाफ एक करोड़ रुपये का मानहानि का केस दायर किया जाएगा। विक्रम रंधावा की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त न किए जाने पर डा. जितेंद्र सिंह की ओर से दिल्ली कोर्ट में उनके खिलाफ केस दायर करवाया गया था।