लखनऊ, जेएनएन। Uttar Pradesh foundation day 2020 : उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस पर यूपी दिवस के तीन दिवसीय रंगारंग आयोजनों का मेला शुक्रवार से लखनऊ से अवध शिल्पग्राम में शुरू हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्ज्वलित कर 'उत्तर प्रदेश दिवस' का उद्घाटन किया। इस दौरान राज्यपाल और मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार पर्यटन, संस्कृति, धर्मार्थ कार्य नीलकंठ तिवारी ने स्मृति चिह्न भेंट की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश अस्तित्व में आया था। आज हमने अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे किए हैं। यह अवसर हम सबके लिए 70 वर्षों की यात्रा पर आत्ममंथन करने का भी है। चुटकी भी ली इस 67-68 वर्षों में किसी को उत्तर प्रदेश के बारे में सोचने की फुर्सत नहीं थी, क्योंकि उन्हें यहां की गौरवशाली परंपराओं और अतीत से कोई सरोकार नहीं था। बता देें, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर समारोह का समापन होगा।

अतीत को विस्मृत करके कोई समाज और राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता

सीएम योगी ने कहा कि अतीत को विस्मृत करके कोई समाज और राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता। अतीत की गौरवशाली परंपराएं हमें जहां आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं, वहीं अतीत के अनुभव के आधार पर हम अपने भविष्य के निर्माण के लिए योजनाएं बनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह वही उत्तर प्रदेश है जो लोकतंत्र की पहली आधारशिला रही है, जहां दुनिया की सबसे पवित्र नदी गंगा सबसे लंबी दूरी तय करती है, जहां गंगा और यमुना का पवित्र संगम प्रयागराज है, जहां दुनिया की सबसे पुरातन नगरी काशी है, जहां हमें राम राज्य की अवधारणा देने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम पैदा हुए। जहां न दैन्यं न पलायनम् का संदेश देने वाले लीलाधारी भगवान कृष्ण पैदा हुए, जहां जन्म लेकर भगवान बुद्ध ने दुनिया को शांति का संदेश दिया, जहां सर्वाधिक जैन तीर्थंकरों का जन्म हुआ। जिसने स्वाधीनता आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और विदेशी हुकूमत से आजादी दिलाने के लिए बलिदान में कभी पीछे नहीं हटा, देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री भी उत्तर प्रदेश ने दिए।

 

मौनी अमावस्‍या में प्रयागराज पहुंचे 2.5 करोड़ श्रद्धालु 

मुख्‍यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष हमने प्रयागराज में कुंभ का आयोजन किया था। लोग मुझसे पूछते थे कि कितने लोग इस आयोजन में आएंगे, तो मैं कहता था कि उत्‍तर प्रदेश की आबादी 23 करोड़ है, इससे कम लोग तो नहीं आएंगे। इसपर लोग कहने लगे कि 2013 में तो सिर्फ 12 करोड़ की आए थे, तो इस बार मान के चलें कि इसके डबल तो आएंगे ही। क्‍योंकि शासन सत्‍ता में हमलोग हैं तो लोगों का विशेष लगाव होगा। 24 करोड़ 56 लाख श्रद्धालु प्रयागराज में आए थे। कुंभ में गंगा के पावन तट पर स्‍नान किया था। आज मौनी अमावस्‍या भी है। इस अवसर पर प्रयागराज में 2.5 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे हैं। सुबह आठ बजे तक 50 लाख श्रद्धालुओं ने स्‍नान संगम में किया था।   

खिलाड़ियों को सम्‍मान 

सीएम ने कहा कि राज्यपाल ने देश-विदेश में उत्‍तर प्रदेश को पहचान दिलाने वाले खिलाड़ियों को रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार और लक्ष्मण पुरस्कार से सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को 6 करोड़ रुपये, रजत पदक पर 4 करोड़ रुपये, कांस्य पदक पर 2 करोड़ और प्रतिभाग पर 10 लाख रुपये की धनराशि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष रूप से दी जाती है। वहीं, राष्ट्रमंडल और एशियन खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को 50 लाख रुपये, रजत पदक पर 30 लाख रुपये, कांस्य पदक पर 15 लाख रुपये और प्रतिभाग पर 5 लाख रुपये की धनराशि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष रूप से प्रदान की जाती है। 

प्रदेश में जिसका कोई नहीं उसका शासन होगा  

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज उत्‍तर प्रदेश के तीसरे स्थापना दिवस पर हमने श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नाम पर 18 कमिश्नरी में 18 अटल आवासीय विद्यालयों का शु्भारंभ किया। इससे पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों के साथ ही निराश्रित बच्चों हेतु भी आवासीय विद्यालय उपलब्ध होंगे। प्रदेश में जिसका कोई नहीं उसका शासन होगा, और शासन अपने इस दायित्व का निर्वहन करेगा। मुझे प्रसन्नता होगी कि हर वर्ष हम उत्तर प्रदेशवासियों को कुछ नया देने में सफल होंगे। आज 'राष्ट्रीय बालिका दिवस' के अवसर पर सभी बेटियों को बधाई। युवाओं के लिए समर्पित यह वर्ष निश्चित ही उत्तर प्रदेश के युवाओं को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। विगत वर्ष से बालिकाओं के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना शुरू की गई। साथ ही विगत वर्ष प्रारंभ हुई। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में एक लाख से अधिक बेटियों की शादियां कराई जा चुकी हैं। उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस पर जिन खिलाड़ियों और उद्यमियों को यहां सम्मानित किया गया है, मैं उन सबको बधाई देता हूं। उत्तर प्रदेश दिवस का यह कार्यक्रम आप सबके लिए मंगलमय हो।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 18 मंडल मुख्यालयों में निर्माण श्रमिकों के बच्चों और निराश्रित बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय का शिलान्यास किया। प्रत्येक मंडल मुख्यालय में एक आवासीय विद्यालय की स्थापना की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पहले स्थापना दिवस पर हमने एक जिला एक उत्पाद ओडीओपी योजना लॉन्च की थी। यह योजना प्रदेश के निर्यात को तेजी से आगे बढ़ाने में कारगर साबित हुई है। जहां देश का निर्यात 7 से 8 प्रतिशत की दर से बढ़ा है वहीं उत्तर प्रदेश का निर्यात 28 फीसद की दर से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दूसरे स्थापना दिवस पर हमने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की और आज तीसरे स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालयों की स्थापना के लिए आधारशिला रख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का दायित्व लोक कल्याण है और वह इसके लिए सदैव तत्पर रहेगा। हम सबको यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि जिसका कोई नहीं उसका शासन होगा। अपने दायित्व का निर्वहन करते रहेंगे।

उत्तर प्रदेश ने देश को नौ प्रधानमंत्री दिए : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 

वहीं, स्थापना दिवस के मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश राम और कृष्ण की जन्म स्थली होने के साथ ही गौतम बुद्ध और महावीर की स्थली भी है। यहां चंद्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला खां और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे क्रांतिकारी भी पैदा हुए जिन्होंने अपूर्व साहस, वीरता और बलिदान से देश को आजादी दिलाने में अपनी भूमिका निभाई। यहां पंडित मदन मोहन मालवीय, जवाहरलाल नेहरू, राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, लाल बहादुर शास्त्री और दीनदयाल उपाध्याय जैसे जननायकों ने भी जन्म लिया। उत्तर प्रदेश अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक चेतना के लिए भी जाना जाता है। यहां कबीर, तुलसी, जायसी, भारतेंदु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद और निराला जैसे साहित्यकारों ने जन्म लिया। जोश मलीहाबादी, जिगर मुरादाबादी, फिराक गोरखपुरी अली सरदार जाफरी, ब्रज नारायण चकबस्त और कैफी आज़मी जैसे शायरों ने हिंदी के साथ उर्दू को एक अलग पहचान दिलाने में अपनी भूमिका निभाई। नृत्य संगीत के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश की समृद्ध परंपरा रही है। उत्तर प्रदेश ने देश को नौ प्रधानमंत्री दिए। 

यूपी में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं : राज्यपाल 

आगे राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिस प्रकार अपनी संस्कृति का संरक्षण किया है वह सराहनीय है। यहां धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां का प्रत्येक जिला अपने विशेष उत्पाद के लिए जाना जाता है। प्रदेश सरकार ने कुशलता से विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन स्थापित किया है। प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति मजबूत हो रही है। दो जिलों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई है जिसके सफल होने पर अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जाएगा। इसकी बहुत जरूरत भी है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को विकास में शामिल होना चाहिए ताकि सभी संपन्न हो सकें।

उप्र दिवस समारोह में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने खेल के क्षेत्र में प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए पांच खिलाड़ियों को रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार और नौ खिलाड़ियों को लक्ष्मण पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार के तौर पर उन्हें कांस्य प्रतिमा, प्रशस्ति पत्र और 3,11,000 की धनराशि के चेक दिए गए। प्रदेश में निवेश के लिए इस मौके पर 6 उद्यमियों को भी सम्मानित किया गया।

25 को ये रहेगा खास, 26 को समापन 

बता दें, आयोजन के दूसरे दिन यानी 25 जनवरी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को समर्पित रहेगा। इस दिन अलग-अलग विभागों की योजनाओं का लोकार्पण होगा। शाम को साढ़े पांच से साढ़े छह बजे तक पंडित रविशंकर म्यूजिकल फाउंडेशन का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। 26 की शाम को कार्यक्रम का समापन हो जायेगा।

समापन समारोह को राज्यपाल व मुख्यमंत्री संबोधित करेंगे। इस दौरान गणतंत्र दिवस पर प्रदेश के इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही राम की विश्व यात्रा तथा कृष्ण व महाभारत पर आधारित लघु चित्रकला प्रदर्शनी लगाई जाएगी। राजकीय अभिलेखों का प्रकाशन कर सभी माध्यमिक स्कूलों में वितरित किया जाएगा। खादी ग्रामोद्योग विभाग ओडीओपी की प्रदर्शनी व सेमिनार लगाएगा। स्वास्थ्य विभाग तीन दिन तक स्वास्थ्य मेले का आयोजन करेगा, जिसमें आयुष्मान कार्ड वितरित होगा। महिला कल्याण विभाग कन्या सुमंगला योजना से जुड़े आयोजन करेगा।

झलकेगी पौराणिक संस्कृति

अवध शिल्पग्राम में प्रदेश की पौराणिक संस्कृति की झलक भी दिखेगी। समारोह में रामायण, महाभारत, कुंभ, दीपोत्सव और कृष्ण जन्मोत्सव के अलावा भी बहुत कुछ होगा। जौनपुर के फौजदार सिंह आल्हा तो लखनऊ के अजीत पांडेय भोजपुरी सुनाएंगे, जबकि ऊषा गुप्ता की कजरी और वंदना मिश्रा के अवधी गायन के साथ शबद, कीर्तन और गुरुवाणी को भी स्वर मिलेगा। जीवनराम का धोबिया और बांदा के रमेश पाल का पाई-डंडा नृत्य भी लोगों को आकर्षित करेगा।

Posted By: Umesh Tiwari

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