लखनऊ, जेएनएन। चीन से फैली महामारी कोरोना वायरस संक्रमण को आगे बढऩे के लिए चिकित्सा संसाधनों को मजबूत करने में जुटी प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अहम फैसला करने जा रही है। सांसदों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में विधायकों के वेतन से भी 30 फीसद की कटौती हो सकती है और उनकी एक वर्ष की निधि को भी कोविड केयर फंड में दान किया जा सकता है। लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को होने जा रही कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है।

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए चल रही जंग और राहत कार्यों से केंद्र सहित सभी राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ आ गया है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत दिवस केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूर किया कि सांसद एक वर्ष तक 30 फीसद वेतन कम लेंगे और दो वर्ष की अपनी निधि पीएम कोविड केयर फंड में दान करेंगे। तभी से अटकलें लगाई जा रही थीं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस तरह का निर्णय ले सकते हैं। चूंकि, यहां विधायक अपनी मर्जी से जनता की मदद के लिए खुले दिल से दान करने में जुटे हैं, इसलिए सरकार ने भी उम्मीद के साथ कदम बढ़ाया है।

सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। इसमें सबसे अहम प्रस्ताव विधायक निधि और वेतन को लेकर ही रखा जाना है। प्रस्ताव बना है कि विधायक 30 फीसद वेतन एक वर्ष तक कम लेंगे। साथ ही एक वर्ष की निधि कोविड केयर फंड के लिए देंगे। बताया गया कि यहां विधानसभा चुनाव में दो वर्ष ही बचे हैं और विधायक अपने क्षेत्र में कुछ विकास कार्य भी कराना चाहेंगे। इसी कारण सांसदों की तरह दो वर्ष की निधि की बजाए एक वर्ष का ही प्रस्ताव है। इसके अलावा उद्योग और किसानों को राहत के लिए भी कुछ प्रस्ताव स्वीकृत किए जा सकते हैं।

17 मार्च के बाद यह कैबिनेट मीटिंग  

इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट मीटिंग 17 मार्च को हुई थी। उत्तर प्रदेश के यह कैबिनेट मीटिंग तीन हफ्ते बाद होने जा रही है। कोरोना वायरस के कहर को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने 24 मार्च को होन वाली कैबिनेट मीटिंग टाल दी थी और तब से अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार की कोई भी कैबिनेट मीटिंग नहीं हुई।

आइएएस-आइपीएस अफसरों की वेतन से भी कटौती की आवाज

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बुधवार शाम पांच बजे होने जा रही कैबिनेट बैठक में कुछ मंत्री अधिकारियों का मुद्दा उठाने की तैयारी में हैं। एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि जब विधायक अपनी निधि देने को सहर्ष तैयार हैं तो आइएएस-आइपीएस अधिकारियों की भी समाज के प्रति जिम्मेदारी बनती है। मंत्री के मुताबिक शासन स्तर के अधिकारियों के वेतन से कुछ कटौती कर फंड में दिए जाने का भी निर्णय होना चाहिए। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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