जेएनएन, गुरदासपुर। शिरोमणि अकाली दल में टकसाली नेताओं की नाराजगी कम नहीं हो रही है। पार्टी के एक और टकसाली नेता सेवा सिंह सेखवां ने आज पार्टी की कोर कमेटी और सीनियर उपप्रधान पद से इस्तीफा दे दिया। सेखवां के पार्टी पदों से इस्तीफा देने के कुछ देर बाद ही पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सेखवां के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर यह कार्रवाई की गई थी। 

इससे पूर्व, गुरदासपुर में पार्टी से नाराज टकसाली नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा व रतन सिंह अजनाला भी सेखवां के साथ प्रेस कांफ्रेंस मौजूद थे। सेखवां ने कहा कि जब तक पार्टी की प्राथमिक लीडरशिप नहीं बदली जाती तब तक वह उसका हिस्सा नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल प्रधानगी पद के काबिल नहीं हैं। सुखबीर ने सिख पंथ व सिखों को अपनी कुर्सी पर कुर्बान कर दिया। इस दौरान रतन सिंह अजनाला ने कहा कि अगर अकाली दल को बचाना है तो पार्टी को सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया को किनारे करना होगा। 

नाराज टकसाली नेताओं ने कहा कि जब अकाली दल की सरकार थी तो उनकी एक नहीं सुनी गई। उन्होंने कहा कि अकाली दल किसी के बाप की पार्टी नहीं है। इस पार्टी को बनाने में सभी का योगदान है। सेखवां ने आरोप लगाया कि बादल और कैप्टन का परिवार आपस में मिला हुआ है।

नाराज नेताओं ने कहा कि बादल ने हमें पद देकर कोई अहसान नहीं किया। हमने ही उसे इस लायक बनाया। आज उन्हीं की नहीं सुनी जा रही। गुरचरण सिंह टोहड़ा द्वारा भी इसी तरह पार्टी छोड़कर आधार गंवाने के सवाल के जवाब में उक्त नेताओं ने कहा उनकी लड़ाई राजनीतिक थी। हमारी सैद्धांतिक है। हम अपनी लड़ाई लड़ते रहेंगे परिणाम चाहे कुछ भी हो।

नाराज टकसाली नेताओं ने कहा कि जब सुखबीर बादल की अपनी सरकार थी तो उन्हें नवंबर महीने में सिर्फ कबड्डी मैच और प्रियंका चोपड़ा का डांस याद रहता था। अाज वह सिखों के कत्लेआम के मुद्दे पर धरने का ड्रामा कर रहे हैं। बता दें, सेखवां से पहले सुखदेव सिंह ढींडसा, रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा भी इस्तीफा दे चुके हैं।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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