लखनऊ, जेएनएन। मिशन 2022 की तैयारियों में जुटी समाजवादी पार्टी (SP) नए कलेवर में दिखने लगी है। अमूमन समाजवादी आंदोलन के पुरोधा राममनोहर लोहिया, नरेंद्र देव, कर्पूरी ठाकुर, जनेश्वर मिश्र, व राजनारायण सरीखी शख्सीयतों की स्मृति में ही कार्यक्रम आयोजित करती रही सपा को अब डॉ. भीमराव आंबेडकर, कांशीराम, सावित्री बाई फुले के अलावा स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों की याद भी सताने लगी है। रविवार को स्वामी विवेकानंद जयंती पर समाजवादियों ने 30 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा निकाल कर पार्टी को परंपरागत खांचे से निकालने का प्रयास किया है।

हालांकि इस साइकिल यात्रा में सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं शामिल नहीं हुए, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, राजेंद्र चौधरी व अहमद हसन जैसे नेताओं ने सक्रिय भागीदारी की। काकोरी से शुरू हुई साइकिल यात्रा को जनेश्वर मिश्र पार्क में खत्म करके समाजवादी रंग चढ़ाने की कोशिश भी की गई। साइकिल यात्रा में शामिल रहे एक पूर्व विधायक ने बताया कि पहली बार पार्टी स्तर पर स्वामी विवेकानंद को याद किया जाना चौंकाने वाला निर्णय है।

पार्टी को परंपरागत ढर्रे से हटाने की छटपटाहट लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद बढ़ी है। शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि केवल एम-वाइ (मुस्लिम-यादव) समीकरण पर प्रदेश की सत्ता में वापसी कर पाना संभव नहीं होगा। पार्टी नेतृत्व को अंदाज हो गया है कि पिछड़ों के साथ दलितों को नहीं जोड़ा गया तो मिशन 2022 हाथ से निकल जाएगा।

सपा दफ्तरों में आंबेडकर के चित्र

समाजवादी पार्टी के कार्यालयों में अब भीमराव आंबेडकर के चित्र भी लगाने के निर्देश हैं। पार्टी की होर्डिंग्स व बैनर आदि पर लोहिया के साथ आंबेडकर की फोटो लगायी जाने लगी है। अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस की तारीख छह दिसंबर को पहली बार सपा ने डॉ. आंबेडकर की पुण्यतिथि बड़े स्तर पर मनाई। इतना ही नहीं सावित्री बाई फुले और कांशीराम को भी याद किया गया। बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए एक पूर्व मंत्री का कहना है कि मायावती के रवैये से नाराज उन दलित नेताओं की पहली पसंद सपा ही है जो भाजपा में जाना नहीं चाहते हैं।

यादवों में बिखराव का भी डर

सपा में जगे स्वामी विवेकानंद प्रेम को लेकर युवा विकास यादव का कहना है कि यादवों में एक बड़ा तबका राष्ट्रवाद की भावना में बह रहा है। इसी कारण सपा दो चुनावों में यादव बहुल क्षेत्रों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रही और भाजपा बढ़त लिए है। ऐसे युवाओं को अपने पाले में करने के लिए सपा एजेंडा बदलने की कोशिश में है।

Posted By: Umesh Tiwari

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस