लखनऊ [अवनीश त्यागी]। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गठबंधन की सियासत में मात खाकर सबक सीखे समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का उपचुनाव में 'एकला चलो' फार्मूला कारगर साबित हुआ। सपा न केवल रामपुर सीट को बचाने में सफल रही वरन जलालपुर और जैदपुर क्षेत्रों में विजय पताका फहराने में भी कामयाब रही। जलालपुर को बसपा और जैदपुर को भाजपा से छीनने के साथ मुस्लिमों को समाजवादी पार्टी से ही जोड़े रखने से अखिलेश यादव को मजबूती मिली है, जिसका लाभ मिशन-2022 में भी मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

बसपा से गठबंधन टूटने और कांग्रेस में प्रियंका वाड्रा की सक्रियता बढ़ने के बाद सपा के सामने करो या मरो जैसे हालात थे। ऐसे में प्रदेश की 12 सीटों (हमीरपुर समेत) में हुए उपचुनावों पर सबकी नजर थी। आजम खां के प्रभाव वाली रामपुर सीट को कब्जाने के लिए भाजपा व बसपा पूरी ताकत लगाए थी। प्रतिष्ठा प्रश्न बनी इस सीट को बचाए रखने में अखिलेश की रणनीति सफल रही। आजम की पत्नी तंजीम फात्मा को मैदान में उतारने का लाभ यह रहा कि मुस्लिमों का एकतरफा धुव्रीकरण साइकिल के पक्ष में हो गया। बसपा व कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशियों को नकार दिया। सपा ने तीन सीटें जीतने के साथ पांच क्षेत्रों में उपविजेता रह कर अपना दम दिखाया।

जलालपुर में सुभाष ने चौंकाया

सपा के लिए रामपुर जीत की तरह जलालपुर सीट जीत लेना भी बड़ी उपलब्धि रही। सपा ने बसपा से जलालपुर सीट छीनी है। यह जीत इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि यहां सपा उम्मीदवार सुभाष राय जातीय चक्रव्यूह को भेदने के साथ बसपा के विधानमंडल दलनेता लालजी वर्मा की पुत्री छाया वर्मा को मात दी। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सुभाष का स्वजातीय वोट नाममात्र का है।

...तो अबू आजमी होंगे मुस्लिम चेहरा

उपचुनावों के साथ महाराष्ट्र में भी सपा ने बेहतर प्रदर्शन किया। यहां तीन सीटों पर लड़ी सपा दो पर जीतने में कामयाब रही। अबू आजमी फिर जीते। सूत्रों का कहना है कि अबू आजमी ने गत दिनों पूर्वांचल के दिग्गज नेता रमाकांत यादव की सपा में वापसी करायी। मुकदमों में घिरे आजम खां के स्थान पर सपा अब अबू आजमी को आजमा सकती है।

Posted By: Umesh Tiwari

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस