जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान में एक माह तक चले सियासी संघर्ष के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की चुप्पी को लेकर कई तरह की चर्चा चली । कांग्रेस का एक वर्ग और भाजपा के नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व वसुंधरा राजे के बीच समन्वय होने की बात कहता रहा। इसी बीच शुक्रवार को वसुंधरा राजे ने अपनी चुप्पी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि 34 दिनों से चल रहे घटनाक्रम के बीच वह इसलिए कहीं नहीं दिखीं, क्योंकि वह सावन के समय धौलपुर में पूजा कर रही थीं।

वसुंधरा राजे ने कहा कि सभी लोग पूजा करते हैं और मैं भी पूजा करती हूं। भाजपा में चल रहे झगड़े को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस संबंध में यहां के नेताओं से पूछा जाना चाहिए। वसुंधरा ने साथ ही यह भी जोड़ा कि मुझे नहीं लगता कि पार्टी में कोई झगड़ा है । उन्होंने उल्टे सवाल दाग दिया कि आप लोगों को ऐसा लगता है क्या? 

वसुंधरा राजे की ताकत

एक पूर्व मंत्री का कहना है कि वसुंधरा राजे इस बात से नाराज हैं कि उनका बार-बार पार्टी के अंदर कुछ लोग अशोक गहलोत के प्रति नरम रवैया नजदीकी बताकर छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। वे पूरे घटनाक्रम पर एक महीने से चुप हैं। एक महीने तक वे धौलपुर के अपने महल में रहीं और कुछ दिन पहले दिल्ली गईं। वसुंधरा राजे समर्थक विधायक पार्टी की ओर से की जा रही बाड़ेबंदी से भी खुश नहीं हैं।

भाजपा के 72 में 35 विधायक ऐसे हैं, जिन्हें वसुंधरा राजे का समर्थक माना जाता है। इनमें से 15 से 17 विधायक तो ऐसे हैं, जो पूरी तरह से वसुंधरा राजे के फैसले के साथ हैं। उनके लिए वसुंधरा राजे ही आलाकमान हैं। इन विधायकों को वसुंधरा राजे का कट्टर समर्थक माना जाता है। जिलों में भी वसुंधरा राजे समर्थक नेताओं की तादाद प्रदेश के अन्य नेताओं से कही अधिक है।

 

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