अयोध्या, जेएनएन। राम जन्मभूमि मंदिर के मामले में सुप्रीम कोर्ट के नियमित सुनवाई का फैसले से पक्षकारों में विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद बढ़ गई है। उनका मानना है कि ऐसा पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन देर से ही सही, दुरुस्त निर्णय हुआ है। 

शीर्ष पीठ मणिरामदास जी की छावनी के महंत एवं रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास ने कहा कि इस विवाद के समाधान को लेकर उदासीनता असहनीय हो रही थी। इससे न केवल देश की न्याय व्यवस्था पर सवाल उठ रहा था बल्कि भगवान राम के ही देश में उनकी जन्मभूमि के प्रति उपेक्षा प्रकट हो रही थी। न्यास अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि नियमित सुनवाई से रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का मार्ग जल्द प्रशस्त होगा।

रामलला के प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास ने कहा, लंबे समय से यह विवाद चल रहा है और अब यह स्पष्ट समाधान के अन्य विकल्प सारहीन हैं। अदालत के ही माध्यम से मंदिर निर्माण संभव है। सुप्रीमकोर्ट में राम मंदिर के पक्षकार एवं निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास ने कहा हम हम तो इस स्थान पर राम जन्मभूमि मंदिर ही मानते हैं।

बाबरी मस्जिद के पक्षकार मो. इकबाल ने कहा कि अदालत जो भी निर्णय दे, हमें मान्य होगा। हमें सबसे बड़ी प्रसन्नता यह है कि अदालत की पहल से सांप्रदायिकता में भरोसा करने वाली ताकतों के हौसले पस्त होंगे और जम्हूरियत को मजबूती मिलेगी। राममंदिर की दशकों तक अदालत में पैरोकारी करते रहे नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा कि मंदिर-मस्जिद विवाद के क्षितिज पर अदालत की उपेक्षा की देश को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। अब यह मसला न्यायालय की परिधि से पुन: हल होने का विश्वास जगना उसी तरह है, जैसे सुबह का भूला शाम को घर आए।

राममंदिर निर्माण के लिए अनशन और आत्मदाह का एलान करने वाले महंत परमहंसदास ने कहा कि फैसला बगैर किसी गतिरोध के सामने आना चाहिए। विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने याद दिलाया कि 2010 के हाईकोर्ट के निर्णय से ही यह स्पष्ट हो चुका है कि जहां रामलला विराजमान हैं, वह राम जन्मभूमि है।

 

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Posted By: Umesh Tiwari

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