अमेठी, (राज्य ब्यूरो)। कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले अमेठी पर गहरी होती केसरिया छाप नेतृत्व की बेचैनी की वजह है। राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद राहुल गांधी का सोमवार से शुरू तीन दिवसीय दौरा भी इसी अभियान की कड़ी माना जा रहा है। दरअसल, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के दो दिन पूर्व हुए दौरे काअसर कम करने की चिंता भी कांग्रेस को सता रही है।

राहुल गांधी जिस बदले अंदाज से मिले उसको लेकर स्थानीय ग्रामीण भी हैरत में हैं। कच्ची दीवारों व फूस के मकानों वाले ग्राम चौहान का पुरवा राहुल गांधी पहुंचे तो युवा संकटा प्रसाद का कहना था कि पहले से इतनी सुध ली होती तो गांवों की तस्वीर बदल गई होती। संकटा प्रसाद से अलग राय रखने वाले 55 वर्षीय भूलेराम का कहना था कि राहुल अमेठी से जुड़े हैं तो विपक्षी नेता भी गुजरात व मुंबई को छोड़कर यहां आ रहे हैं।

राहुल गांधी ग्रामीण से सीधे संवाद करते हुए न केवल उनके परिवार के बारे में जानकारी लेते बल्कि उनके जीवनयापन की खबर भी लेते दिखे। किसानों के दुख दर्द की जानकारी लेते समय राहुल भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुटकी लेने से नहीं चूकते। राहुल का फोकस किसानों पर आम जनता की समस्याओं को लेकर अधिक रहा। सुकुलबाजार से जैनबगंज तक करीब 35 किलोमीटर की दूरी धूल भरी टूटी सड़कों से गुजरते हुए राहुल रास्ते में पड़ने वाले दुकानकारों से मुलाकात भी करते और सेल्फी लेने की छूट भी युवाओं को देते रहें।

कार्यकर्ता कनेक्ट बढ़ाने के लिए राहुल गांधी ने स्व. उमाकांत द्विवेदी व राजेश कुमार के परिवारीजन से मिलकर संवेदना भी व्यक्त की। राहुल गांधी ने केदारनाथ पांडेय की गुमटी पर बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए स्थानीय ग्रामीणों को अपनी बात खुलकर कहने की इजाजत दी। टोकाटाकी करने वाले कांग्रेसियों को भी रोका। पसीने से तरबतर राहुल ने बीच रास्ते में काफिला रोक कर आधा घंटे खेतों में भोजन भी किया।

गुटबाजी भी दिखी 

लखनऊ एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए पहुंचे कांग्रेसियों की गुटबाजी भी राहुल के सामने उभरी। एक गुट ने पार्टी कार्यालय के प्रमुख पदाधिकारियों पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल अपने चहेतों को ही राहुल से मिलने का मौका दिया जाता है। नाराज कार्यकर्ताओं ने न केवल राहुल से शिकायत की वरन सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को प्रचारित किया।

Posted By: Arti Yadav

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