लखनऊ, जेएनएन। Defence Expo 2020 : एशिया में रक्षा उत्पादों की सबसे बड़ी प्रदर्शनी डिफेंस एक्सपो 2020 का बुधवार को यूपी की राजधानी में उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प दोहराया, इसकी वजहें भी बताईं। चालीस देशों के रक्षा मंत्रियों, देश-विदेश के रक्षा विशेषज्ञों और उद्यमियों की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि 'हमारे ऊपर भारतीय महासागर क्षेत्र के साथ दुनिया के बड़े हिस्से में मानवता को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। पड़ोस के मित्र देशों को सुरक्षा देने का दायित्व भी हमारे ऊपर है। हमारे पड़ोस में ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थितियां हैं जिनसे निपटने के लिए हमेशा तैयार रहने की जरूरत है।' 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ने रक्षा मंत्रालय के इस आयोजन को दुनिया के टॉप डिफेंस एक्सपो में से एक बताते हुए कहा कि यह भारत की विशालता, व्यापकता, विविधता और विश्व में उसकी विस्तृत भागीदारी का जीता-जागता सुबूत है। इस बात का भी सुबूत है कि सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में भारत एक सशक्त भूमिका लेकर आगे बढ़ रहा है। यह सिर्फ रक्षा नहीं बल्कि समग्र रूप में भारत के प्रति दुनिया के आत्मविश्वास को प्रकट करता है।

भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए अपार अवसर भी है। डिफेंस एक्सपो 'मेक इन इंडिया' के जरिये देश की सुरक्षा बढ़ाएगा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करेगा। एक्सपो में आये उद्यमियों से उन्होंने देश में रक्षा क्षेत्र में निवेश का आह्वान किया। यह कहते हुए कि यहां लगा एक-एक पैसा आपको बड़ा रिटर्न देगा और भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

गंभीर होती जा रहीं सुरक्षा की चुनौतियां

पीएम मोदी ने कहा कि मानव जीवन का इतिहास जितना पुराना है, सुरक्षा की चुनौतियां भी उतनी ही पुरानी। युग बदलने के साथ सुरक्षा की चिंताएं और चुनौतियां गंभीर होती जा रही हैं। जिंदगी जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी पर आश्रित होती चली जा रही है, सुरक्षा की चिंताएं भी तकनीकी पर आधारित होती जा रही हैं। टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल, आतंकवाद और साइबर हमले विश्व के लिए बड़ी चुनौती हैं। इनसे निपटने के लिए भारत भी नई तकनीकें ईजाद कर रहा है। इसलिए देश में रक्षा उत्पादन में इंटरनेट ऑफ मिलिट्री थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सेक्योरिटी जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का रोडमैप तैयार किया गया है।

पांच साल की कार्ययोजना

भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने अगले पांच वर्ष की कार्ययोजना भी बतायी। कहा कि अगले पांच वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के 25 उत्पाद विकसित करने का लक्ष्य है। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु व मध्यम दर्जे के उद्योगों की संख्या को बढ़ाकर 15 हजार के पार पहुंचाने का भी इरादा है। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नवप्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए 2018 में इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस की शुरुआत की गई थी। इसे रफ्तार देने के लिए 200 नये स्टार्ट अप शुरू करने का निर्णय किया गया है।

कोशिश होगी कि इसके जरिये अगले पांच वर्षों में 50 नई टेक्नोलॉजी विकसित की जा सके। आगामी पांच वर्षों में रक्षा उत्पादन से जुड़े 5000 आयातित कंपोनेंट का निर्माण भी देश में ही शुरू करने की योजना है। देश का डिफेंस एक्सपोर्ट जो पिछले दो वर्षों के दौरान 17000 करोड़ रुपये रहा है, अगले पांच वर्षों के दौरान उसे 35 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य है। रक्षा क्षेत्र के लिए दीर्घकालीन समेकित योजना बनाने की भी मंशा है।

आयात पर निर्भर रहकर कैसे देखते सपना

पूर्ववर्ती सरकारों का जिक्र किये बगैर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रक्षा निर्माण के क्षेत्र में भारत दुनिया की प्रमुख शक्ति रहा है, लेकिन आजादी के बाद हमने अपनी ताकत का उपयोग उस गंभीरता से नहीं किया। हमारी नीति-रणनीति रक्षा उत्पादों का आयातक बनने तक सीमित रही। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी, दूसरी सबसे बड़ी सेना और सबसे बड़ा लोकतंत्र। हम कब तक रक्षा आयात पर निर्भर रहते? रक्षा आयात के कारण देश का कुल आयात बढ़ रहा है। यह स्थिति रहते हम भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना कैसे देख सकते थे?

हमारी महत्वाकांक्षी किसी के खिलाफ नहीं

भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की पुरजोर वकालत करने के साथ ही पीएम मोदी ने इससे उपजी आशंकाओं को भी निर्मूल ठहराने की कोशिश की। यह कहते हुए कि 'हमारी महत्वाकांक्षा किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं है। न कभी किया है, न ही ऐसा करने की हमारी इच्छा है। भारत हमेशा विश्व शांति का भरोसेमंद साझेदार रहा है।

उप्र बनेगा रक्षा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उप्र आने वाले समय में देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा। उन्होंने बताया कि दो साल पहले देश में दो डिफेंस कॉरीडोर का एलान किया गया था, एक तमिलनाडु और दूसरा उप्र में। तमिलनाडु के डिफेंस कॉरीडोर में जहां अब तक 3100 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, वहीं उप्र के डिफेंस कॉरीडोर में 3400 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। अमेठी में एके-203 रायफल बनाने के लिए भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह आने वाले समय में विश्व स्तरीय सप्लाई चेन तैयार करेगा।

Posted By: Umesh Tiwari

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