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Jammu Kashmir: पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती 14 महीने बाद नजरबंदी से रिहा

जम्मू-कश्मीर प्रशासन के प्रवक्ता रोहित कंसल ने कहा कि पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती को हिरासत से रिहा किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाने से एक दिन पहले 4 अगस्त की रात महबूबा मुफ्ती को हिरासत में लिया गया था।

By Arun Kumar SinghEdited By: Wed, 14 Oct 2020 09:41 AM (IST)
पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को 14 माह बाद मंगलवार को प्रदेश सरकार ने रिहा कर दिया। महबूबा की रिहाई के लिए सर्वोच्‍च न्यायालय में दायर याचिका पर 15 अक्टूबर को सुनवाई होनी थी। महबूबा की रिहाई को प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों की बहाली की दिशा में केंद्र सरकार के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश में जल्द ही पंचायत उपचुनाव होने वाले हैं।

महबूबा को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को लागू किए जाने के मद्देनजर प्रदेश प्रशासन ने एहतियातन पांच अगस्त 2019 की सुबह हिरासत में लिया था। इसके बाद इसी साल फरवरी में उन्हें जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत बंदी बनाया गया था। उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने भी अपनी मां की रिहाई की पुष्टि करते हुए कहा कि महबूबा मुफ्ती की हिरासत मंगलवार को समाप्त हो गई है। इस मुश्किल वक्त में साथ देने वालों की मैं आभारी हूं।

महबूबा को रिहा किए जाने की पुष्टि जम्मू-कश्मीर प्रदेश प्रशासन के प्रवक्ता रोहित कंसल ने भी की है। उन्होंने कहा कि पीडीपी अध्यक्ष को रिहा कर दिया गया है। 15 दिन पहले ही सर्वोच्च न्यायालय ने महबूबा की रिहाई के लिए उनकी बेटी इल्तिजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जम्मू-कश्मीर प्रदेश प्रशासन से पूछा था कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री की कैद को जन सुरक्षा अधिनियम के तहत एक साल से आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर बढ़ाया जा सकता है तो इसे कितने समय के लिए और बढ़ाए जाने पर विचार किया जा रहा है। अदालत ने प्रदेश प्रशासन को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। इस मामले की सुनवाई 15 अक्टूबर को होनी थी।

पूर्व मुख्‍यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 'मुझे यह सुनकर खुशी हुई कि महबूबा मुफ्ती को रिहा किया जा रहा है। महबूबा को एक साल से अधिक हिरासत में रखने के बाद रिहा किया गया है। उनको लगातार निरोध में एक देशद्रोही कदम था और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ था। महबूबा का स्वागत करते हैं।'

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