चंडीगढ़/अमृतसर, जेएनएन। भारत और पाकिस्‍तान में करतारपुर कॉरिडोर पर भारत और पाकिस्‍तान के बीच दूसरे दौर की वार्ता अटारी वाघा बॉर्डर पर आज हो रही है। इसमें हिस्सा लेने के पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल के नेतृत्व में 20 पाकिस्तानी अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल पहुंच गया है। भारत चाहता है कि पाकिस्‍तान करतारपुर कॉरिडोर के अपने हिस्‍से में क्रीक क्षेत्र में पुल का निर्माण करे, लेकिन पाकिस्‍तान इसके लिए तैयार नहीं है। कॉरिडोर के मामले फंसे इस पेंच को दूर करने के लिए दाेनों देशों के अधिकारी बैठक कर रहे हैं। भारत ने अपने हिस्‍से में कॉरिडोर का करीब 60 फीसदी कार्य पूरा कर लिया है तो पाकिस्‍तान ने अपने क्षेत्र में कॉरिडोर का 80 फीसद कार्य पूरा करने का दावा किया है।

गाेपाल चावला को पीएसजीपीसी से हटाकर पाक ने दिया सकारात्‍मक संकेत, लेकिन साथ ही दिखा दिया रंग

दूसरी ओर, वार्ता से पहले पाकिस्तान ने भारत के विरोध के बाद पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) से विवादित गोपाल चावला को हटा दिया है। करतारपुर कॉरिडोर की गतिविधियों में पीएसजीपीसी समन्वयक की भूमिका निभाने वाली है। इसी कारण भारत ने पीएसजीपीसी में खालिस्तान समर्थक तत्वों की उपस्थिति पर आपत्ति व्यक्त की थी। पाकिस्तान ने शनिवार को खालिस्तान समर्थक गोपाल सिंह चावला को हटानते हुए नई कमेटी की घोषणा की। चावला पीएसजीपीसी का महासचिव था। लेकिन कमेटी में दूसरे खालिस्तान समर्थक अमीर सिंह को शामिल कर लिया गया। अमीर सिंह खालिस्तानी नेता बिशेन सिंह का भाई है।

 करतारपुर कॉरिडोर में आए गतिरोध को दूर करने की कोशिश करेंगे भारत व पाकिस्‍तान के अधिकारी

उधर, कॉरिडोर पर रविवार को होने वाली बैठक में निर्माण कार्यों सहित विभन्‍न पहलुओं पर चर्चा होगी। इसमें क्रीक एरिया में सड़क या पुल पर बने गतिरोध को दूर करने पर प्रमुख रूप से बातचीत होने की उम्‍मीद है। अटारी वाघा बॉर्डर पर वार्ता की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

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बता दें कि यह कॉरिडोर करीब 4.70 किलोमीटर लंबा है। इसका निर्माण श्री करतारपुर गुरुद्वारा साहिब में दर्शन के लिए जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए किया जा रहा है। इससे भारत से प्रतिदिन पांच हजार श्रद्धालु श्री करतारपुर साहिब जा सकेंगे। इस कॉरिडोर का शुभारंभ श्री गुरु नानकदेव जी के 550वें प्रकाशोत्‍सव के अवसर पर इस साल नवंबर में हाेगा। श्री गुरु नानकदेव जी का 550वां प्रकाशोत्‍सव 12 नवंबर को है।

सूत्रों के अनुसार, भारत चाहता है कि पाकिस्‍तान कॉरडोर के क्रीक एरिया (नदी क्षेत्र) में पुल का निर्माण करे, लेकिन पाकिस्‍तान इसके लिए तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि भारत रावी नदी पर एक किमी लंबा पुल बनाने के पक्ष में है, लेकिन यहां पक्‍की सड़क बनाने की बात कर रहा है। भारतीय अधिकारी नदी के कारण बाढ़ की आशंका का हवाला देते हुए सड़क निर्माण पर आपत्ति जता रहे हैं।

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पाकिस्‍तान का कहना है, कि वह इस जगह पर पक्‍की सड़क ही बनाएगा। पाकिस्‍तान के इस रुख के कारण भारत को परेशानी है। यह एरिया बाढ़ संभावित है और यदि यहां पुल नहीं बना तो भारतीय क्षेत्र में भारी बाढ़ का खतरा होगा। वैसे बताया जाता है कि इस मुद्दे पर पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि कि सड़क के चारों ओर एक बांध बनाया जा सकता है और बाढ़ का पानी सड़क पर नहीं आए इसके लिए सड़क की ढाल (स्‍लोप) अधिक रखा जा सकता है। भारत का कहना है कि ढाल रखने से बाढ़ का खतरा बढ़ेगा।

बता दें कि भारज की ओर से श्री करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह कॉरिडोर बेहद खूबसूरत और भव्‍य होगा। भारत इसमें हाईटेक सर्विलांस सिस्‍टम और मजबूत सुरक्षा प्रणाली स्‍थपित करेगा।  भारत में करतारपुर  कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूरी रफ्तार से चल रहा है। भारत की ओर से इसका निर्माण कार्य  60 फीसद से अधिक पूरा कर लिया गया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान का दावा है कि उसने अपनी ओर कॉरिडोर को 80 फीसद काम पूरा कर लिया है।

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बता दें कि 8 नवंबर को गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव से पहले भारत और पाक सरकार इस कॉरिडोर को श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए खोलेगी। लाखों श्रद्धालुओं को इस दिन का बेसब्री से इंतजार है। गुरदासपुर में इंजीनियर मलकीत सिंह ने बताया कि सड़क पर मिट्टी डालने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। पंजाब सरकार की ओर से भी चौक काहलावाली से डेरा बाबा नानक, डेरा बाबा नानक से फतेहगढ़ चूडिय़ां और गांव रामदास रोड गांव ठेठरके की पुली तक सड़क को चौड़ा करने का काम लगातार चल रहा है।

ऐसा हाेगा कॉरिडोर का स्‍वरूप

श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर ( Kartarpur corridor) बहुत ही भव्‍य होगा। इसका पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग (पीटीबी) खालसाई परंपराओं के अनुरूप होगा।  तीर्थयात्रियों के लिए पीटीबी कॉम्प्लेक्स में सभी आवश्यक यात्री सुविधाएं करवाई जाएंगी। बता दें कि काॅरिडोर का शिलान्‍यास पाकिस्तान में वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान और भारत में उपराष्ट्रपति एम वेंकेया नायडू ने शिलान्यास किया था। डेरा बाबा नानक में बनने वाले पीटीबी के लिए पंजाब सरकार 50 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की है। 

 

21,650 वर्ग मीटर एरिया में पूरी तरह से वातानुकूलित इमारत का होगा निर्माण

50 एकड़ में बनने वाले पीटीबी को दो चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण 15 एकड़ में इसका निर्माण व विकास होगा। इसके बाद अगले चरण में अन्‍य हिस्‍से का निर्माण होगा। पहले चरण में विकसित किए जाने वाले पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स की रुपरेखा के अनुसार यह बेहद भव्‍य होगा। पहले चरण में लगभग 21,650 वर्ग मीटर एरिया में पूरी तरह से वातानुकूलित इमारत बनाई जाएगी।  इसका स्‍वरूप पूरी तरह खालसाई होगा। पीटीबी कॉम्प्लेक्स के ऊपर खंडे का निशान लगाया जाएगा। यह निशान एकता और मानवीय मूल्य का प्रतीक है।

यह भव्‍य भवन विकलांगों के अनुकूल होगा और इसमें समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को दिखाने वाले  भित्ति चित्र व चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। इसमें प्रतिदिन लगभग 5000 तीर्थयात्रियों के सुगम आवागमन की प्रक्रिया के लिए पर्याप्त आव्रजन और सीमा शुल्क निकासी सुविधाएं होंगी।

कॉम्प्लेक्स की अनुमानित लागत 190 करोड़ रुपये तक है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक 300 फीट राष्ट्रीय ध्वज भी लगाया जाएगा।

13 को पाकिस्‍तानी शिष्टमंडल के साथ होगी बैठक
13 मार्च को पाकिस्तान का शिष्टमंडल करतारपुर कॉरिडोर पर विस्तृत बातचीत के लिए आएगा। इस बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होगी कि भारत से करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में जाने के लिए क्या पहचान पत्र दिखाए जा सकेंगे, एक दिन में कितने यात्रियों को जाने की सुविधा होगी। लंबे समय तक वहां रहने के लिए क्या पॉलिसी बनेगी? यात्रियों को पैदल जाने की सुविधा होगी कि नहीं आदि पर विस्‍तार से चर्चा होने की संभावना है।

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करतारपुर साहिब: कब क्या हुआ

 - 1522 : श्री गुरु नानक देव जी ने गुरुद्वारे की स्थापना की और एक किसान की तरह जिंदगी बिताने का निर्णय किया।

- 1539: श्री गुरु नानक देव जी ने देह का त्याग कर गुरु अंगद देव को उत्तराधिकारी बनाया।

- 1947: विभाजन के दौरान गुरदासपुर जिला भी दो हिस्सों में बंट गया और गरुद्वारा करतारपुर साहिब पाकिस्तान चला गया।

- 1971: पाकिस्तान के नारोवाल और भारत के गुरदासपुर को जोडऩे वाला रावी नदी पर बना पुल भारत-पाक युद्ध में तबाह हो गया।

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- 1995: पाकिस्तान सरकार ने गुरुद्वारे की मरम्मत करवाई।

- 2000: पाकिस्तान ने करतारपुर के वीजा फ्री यात्रा की घोषणा की।

- 2001: पाकिस्तान ने विभाजन के बाद पहली बार भारतीय जत्थे को करतारपुर साहिब जाने की अनुमति दी।

- 2002: अप्रैल में जत्थेदार कुलदीप सिंह वडाला और करतारपुर रावी दर्शन अभिलाषी संस्था ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिख कर पाकिस्तान के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की मांग की।

- 2004: पाकिस्तान सरकार ने गुरुद्वारे का पूरी तरह कायाकल्प किया।

- 2008: तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने डेरा बाबा नानक का दौरा किया और फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने की बात कही।

- 2008: एसजीपीसी ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह व विदेश मंत्री एसएम कृष्णा को पत्र लिख कॉरिडोर के निर्माण की मांग की।

- 2018: 17 अगस्त को सिद्धू पाकिस्तान के नए पीएम इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए और पाक सेना प्रमुख को जफ्फी डाली। विवाद पर सिद्धू ने बताया कि पाक सेना प्रमुख ने उन्हें करतारपुर मार्ग खोलने का भरोसा दिया है।

- 2018: 22 अगस्त को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पत्र लिख यह मामला पाकिस्तान से उठाने को कहा।

- 2018: 7 सितंबर को पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कॉरिडोर खोलने का ऐलान किया। बाद में पाकिस्तान ने इसको नकार दिया।

- 2018: 9 नवंबर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बार फिर सुषमा स्वराज को पत्र लिखकर यह मामला पाकिस्तान से उठाने की मांग की।

-26 नवंबर 2018: भारत के उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू ने डेरा बाबा नानक में करतारपुर कॉरिडोर का नींव पत्थर रखा।

- 22 दिसंबर 2018: केंद्रीय कैबिनेट ने गुरु नानक देवजी के 550वें प्रकाशोत्सव वर्ष पर डेरा बाबा नानक से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमा तक करतारपुर कॉरिडोर बनाने का फैसला लिया।

- 9 मार्च, 2019: कॉरिडोर के मुद्दे पर अटारी में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बैठक।

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Posted By: Sunil Kumar Jha