नई दिल्ली (जेएनएन)। योगेंद्र यादव ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों के एलान के बाद तुरंत ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी थी-' पिछले तीन साल में मैंने ना जाने कितने लोगों को कहा कि अरविंद केजरीवाल में और जो भी दोष हों, कोई उसे ख़रीद नहीं सकता। इसीलिए कपिल मिश्रा के आरोप को मैंने ख़ारिज किया। आज समझ नहीं पा रहा हूं कि क्या कहूं? हैरान हूं, स्तब्ध हूं, शर्मसार भी।' आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ताओं के इतर अन्य लोगों को राज्य सभा का उम्मीदवार बनाए जाने सहित, इसके बाद से उठे सवाल, इसके परिणाम सहित अन्य विषयों पर आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य और वर्तमान में स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव से वरिष्ठ संवाददाता अभिनव उपाध्याय की बातचीत के प्रमुख अंश:

1. ऐसा क्या है कि अब आपने अरविंद केजरीवाल की ईमानदारी पर सवाल उठा दिया?

- मैंने यह नहीं कहा है कि पैसे के लेनदेन का मेरे पास कोई प्रमाण है। मुझे केवल इतना लगता है कि सुशील गुप्ता को टिकट देने का पैसे के अलावा तो कोई तर्क हो नहीं सकता। एक व्यक्ति जो कल तक कांग्रेस में था। अरविंद केजरीवाल के खिलाफ पोस्टर लगवाता था। उसका आम आदमी पार्टी के सिद्धांतों से कोई लेना देना नहीं था वह अचानक आए और टिकट ले जाए तो लोग पूछेंगे कि आखिर उसमें ऐसा कौन सा गुण था। उनका पैसा उनको इस टिकट का हकदार बना रहा है। मैं यह नहीं कह रहा कि किसने पैसा किसको दिया, कहां दिया यह मैं नहीं जानता।

2. क्या आम आदमी पार्टी इस निर्णय के बाद विघटन की तरफ बढ़ रही है?

-मैं समझता हूं कि कोई भी यदि सच्चा कार्यकर्ता जो पार्टी में बचा होगा उनकी आंखें खुल गई होंगी। कार्यकर्ता केवल दुखी ही नहीं नाराज हैं। यह स्वाभाविक है। जो लोग रामलीला मैदान से एकत्रित हुए थे वे कुर्सी के लिए नहीं देश बदलने के लिए आए थे। वे ठगा महसूस कर रहे हैं। आज आदर्शवादी लोग अब अपने लिए रास्ता तलाशेंगे।

3. आम आदमी पार्टी सरकार तीन साल पूरे करने जा रही है? 2020 में फिर चुनाव है, क्या इस निर्णय को चुनाव से जोड़कर देखते हैं?

-2020 के चुनाव की तैयारी की पैसे को लेकर आज से ही होगी ऐसा, मुझे नहीं लगता। दिल्ली में सरकार में बैठी सत्ताधारी पार्टी पैसा बना रही है। मैं समझता हूं कि ये मामला उससे कहीं आगे बढ़कर है। यह एक व्यक्ति से पैसा लेने के मामले से ज्यादा जिन स्रोतों से पैसा जोड़ने का मामला लगता है। जैसे मुलायम सिंह ने अमर सिंह के माध्यम से जोड़ा था। जैसे लालू प्रसाद ने प्रेम गुप्ता के माध्यम से जोड़ा था। कुछ वैसा मामला नजर आता है।

4. केजरीवाल का यह निर्णय पार्टी को कहां ले जाएगा?

-मैं समझता हूं कि आंदोलन के आदर्श सपने स्वराज पता नहीं कब के पीछे छूट गए। अब जबकि चुनावी तौर पर भी पार्टी की असफलता पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश, गोवा और गुजरात में जाहिर हो चुकी है तो अब पार्टी का नेतृत्व उसी दिशा में ले जा रहा है। जहां देश की कई क्षेत्रीय पार्टियां जाती हैं। यानी शुरुआत आंदोलन से फिर एक गिरोह की संपत्ति और उसके बाद एक व्यक्ति की संपत्ति।

5. कुमार विश्वास की उपेक्षा के पीछे की क्या वजह मानते हैं?

- कुमार विश्वास भाई मेरे आंदोलन के साथी थे। मैं सामान्यत: पार्टी के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी नहीं करता हूं, लेकिन कभी कभी जब सीमा लांच जाते हैं तब टिप्पणी करता हूं।

 

Posted By: JP Yadav