नई दिल्ली [वीके शुक्ला]। PM Modi Arvind Kejriwal:  आम आदमी पार्टी अब हर उस मंच से दूरी बनाकर रखती है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में सजते हैं। यहां तक कि आंदोलनकारी नेता के रूप में उग्र रहने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी प्रधानमंत्री मोदी को लेकर अपने पूर्व के तेवर में नहीं दिखते हैं। अब प्रधानमंत्री के प्रति उनका रवैया नरम दिख जाता है। कारण साफ है कि आम आदमी पार्टी अब अपने को मोदी विरोधी नहीं दिखाना चाहती है। आम आदमी पार्टी की बात करें तो यह वह पार्टी है जो दिल्ली में कांग्रेस को हटाकर सत्ता में काबिज हुई। पहली बार और दूसरी बार सत्ता में आने के समय यह पार्टी भाजपा को लेकर काफी आक्रामक थी, मगर अब आप को यह बात महसूस हो चुकी है कि इसे भाजपा से नहीं कांग्रेस से अधिक खतरा है। इस बार को इससे भी बल मिलता है कि इसे पिछले लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक में पार्टी का जोर इस बात पर रहा है कि कांग्रेस को वोट ना दें। जबकि AAP के सामने मैदान में सीधे भाजपा थी।

यह सब बताना इसलिए जरूरी है कि मोदी विरोधी खेमे में शामिल नहीं होने के पीछे आम आदमी पार्टी की रणनीति क्या है? यह केवल पहला मौका नहीं है पिछले 3 सालों के प्रमुख आयोजनों को देखा जाए तो आम आदमी पार्टी ने हम उन सभी मंचों से दूरी बना कर रखी है जो मंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में सजते रहे हैं। आम आदमी पार्टी ही नहीं मुख्यमंत्री केजरीवाल के नरेंद्र मोदी को लेकर नजरिए में भी बदलाव देखा गया है। यहां तक कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री पर निशाना नही साधा और अपना नाता दिया कि हम विकास के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं।

गत फरवरी में तीसरी बार सत्ता में आई आम आदमी पार्टी के शपथ ग्रहण समारोह में दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों और नेताओं को आमंत्रित नहीं किया जाना भी इसी से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इस बारे में आम आदमी पार्टी ने उस समय जरूर सा़फ किया था कि शपथ ग्रहण दिल्ली के मुख्यमंत्री का है। दिल्ली की जनता आयोजन में शामिल होने की हकदार है, इसलिए दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों और दूसरी नेताओं को आमंत्रित नहीं किया गया।

इस तरह के मुद्दों से एक बात साफ हो चुकी है कि सैद्धांतिक तौर पर आम आदमी पार्टी किसी भी सूरत में भाजपा से आमने-सामने का टकराव नहीं चाहती है। हालांकि मोदी विरोधी धारा यह सोचती है कि केजरीवाल मॉडल और मोदी मॉडल में टकराव है।वजह यह है कि वे मोदी मॉडल का विकल्प खोजने को अधीर है। मगर खुद केजरीवाल मॉडल खुद को विकल्प के तौर पर पेश करने से भी बच रहा है। उसका पूरा जोर केवल खुद को मजबूत करने पर है। उसका पूरा जोर केवल खुद को मजबूत करने पर है।

राजनीतिक जानकारों की माने तो आदमी पार्टी अब केंद्र सरकार के विरोध में होने वाले आयोजनों से इसलिए भी दूरी बना रही है कि उसे दिल्ली को विकास चाहिए है। AAP इस बात को समझ रही है कि केंद्र से बिगाड़ कर ऐसा हो पाना संभव नही है। शायद सोनिया गांधी की ओर से बुलाई गई विपक्ष की बैठक में आम आदमी पार्टी शामिल नहीं हुई है। हालांकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल साफ कर चुके हैं कि यह समय संकट का है। राजनीति करने का नही है। सब को मिलकर काम करने की जरूरत है। केंद्र सरकार दिल्ली को पूरी मदद दे रही है।

Posted By: JP Yadav

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