नई दिल्ली ,जागरण संवाददाता। Unnao Case: कुलदीप सेंगर को सजा देने के साथ ही तीस हजारी अदालत के सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने इस पूरे प्रकरण पर तल्ख टिप्पणी की। न्यायाधीश ने कहा कि लोकतंत्र के एक जिम्मेदार व्यक्ति ने घिनौना कार्य किया है। एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी गरिमा, शुद्धता, सम्मान और प्रतिष्ठा पर दाग लगाया गया।

न्‍याय का दमन नहीं हो सकता

न्यायाधीश ने कहा कि दबंग व्यक्ति द्वारा किए गए इस तरह के जघन्य अपराध में दया करने का मतलब न्याय का दमन करना होगा। इसमें उदारता की दलील को नहीं माना जा सकता। अदालत ने 25 लाख जुर्माना और 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश देते हुए पीड़िता के लिए चिंता प्रकट की।

मुआवजे की रकम से खोया जीवन वापस नहीं मिल सकता

न्यायाधीश ने कहा कि मुआवजे की कोई भी रकम खोया हुआ जीवन वापस लाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी, लेकिन पीड़िता और पीड़ित परिवार के लिए यह रकम उनके अपमान की भरपाई और दुर्दशा के लिए कुछ सांत्वना जैसी होगी।

खुद और गुर्गों से पीड़िता व परिवार को नुकसान पहुंचाने की सभी कोशिशें कीं

दोषी ने जब दुष्कर्म जैसा यह अपमानजनक कृत्य किया, तब वह लोकसेवक था। खुद और अपने गुर्गों की मदद से पीड़िता और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने के लिए उसने हर घिनौना काम किया। परिवार की आवाज को कुचलने के लिए पूरा जोर लगाया।

पीड़िता की बहन ने कहा

न्याय का एक पड़ाव पार किया है और जंग अभी जारी है। ऐसे अपराधों में दबंग लोगों को इस तरह की सख्त सजा मिलना जरूरी है, ताकि कोई दूसरा किसी भी बेटी से ऐसा करने की सोच भी न सके। अगर कोई ऐसे लोगों के खिलाफ आवाज उठाता है तो क्या उन्हें मरवा देना सही है? हमें पूरी उम्मीद है कि अन्य मामलों में भी न्याय मिलेगा।

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Posted By: Prateek Kumar

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