नई दिल्ली, जेएनएन। इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में सोमवार को आयोजित शोकसभा में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि दी गई। इसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि शीला अपने अंतिम दिनों में तकलीफ में थीं।

उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि इंसान को जाने के बाद याद किया जाता है। शीला ने दिल्ली का जितना विकास किया, उतना किसी अन्य सरकार ने नहीं किया है। लेकिन, उनका योगदान भुला दिया गया। इससे शीला जी को बहुत तकलीफ उठानी पड़ी। पिछले कुछ समय से जिस तरह का खिंचाव और तनातनी का माहौल बना था, उसे देखकर ऐसा लगा कि आखिर ऐसा क्यों है।

अब्दुल्ला ने कहा कि कभी-कभी तो उन्हें लगता है कि राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। कयास लगाए जा रहे हैं कि अब्दुल्ला ने पार्टी की दिल्ली इकाई में चल रही गुटबाजी को लेकर यह बात कही है।

यहां पर बता दें कि दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित का 20 जुलाई को निधन हो गया। वे 81 साल की थीं। उनका निधन दिल्ली के फोर्टिस एस्कार्ट्स अस्पताल में हुआ। वे बीते कुछ समय से हृदय संबंधी रोगों के चलते गंभीर रूप से बीमार थीं।

शीला दीक्षित 1998 से 2013 तक लगातार 15 सालों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। यह एक तरह का रिकॉर्ड है। इसके बाद उन्होंने 2014 में उन्हें केरल का राज्यपाल बनाया गया था, लेकिन अगस्त, 2014 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद 2019 के आम चुनावों के वक्त शीला दीक्षित दिल्ली की प्रदेश अध्यक्ष रहीं। उन्होंने उत्तर-पूर्व दिल्ली से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा लेकिन मनोज तिवारी के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

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