नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों (नई दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली, उत्तर पश्चिमी दिल्ली और चांदनी चौक) पर हुई कांग्रेस की हार को लेकर नेता कितने फिक्रमंद हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि समीक्षा बैठकों का पूर्व नियोजित शिड्यूल घोषित होने के बावजूद बृहस्पतिवार को प्रदेश कार्यालय में न तो पूरी कमेटी पहुंची और न ही सभी प्रत्याशी।

पांच सदस्यीय कमेटी के चार सदस्य करीब दो घंटे तक प्रत्याशियों एवं जिला अध्यक्षों का इंतजार ही करते रहे। सात में से दो प्रत्याशी और 14 में से छह जिलाध्यक्ष आए भी तो 10 से 15 मिनट में अपनी बात कहकर निकल लिए। पांच लोकसभा सीटों की बैठक के लिए अब शनिवार को दोबारा शिड्यूल बनाया गया है।

गौरतलब है कि सोमवार को ही प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित ने दिल्ली में पार्टी की हार की समीक्षा करने के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी में पूर्व सांसद परवेज हाशमी, पूर्व मंत्री डॉ. एके वालिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष योगानंद शास्त्री, एआइसीसी प्रवक्ता पवन खेड़ा और पूर्व विधायक जयकिशन को शामिल किया गया है। कमेटी दस दिन के भीतर शीला दीक्षित को अपनी रिपोर्ट देगी।

रिपोर्ट में हार के कारणों सहित पार्टी या प्रत्याशियों की खामियों और मौजूदा स्थिति में सुधार के उपाय भी शामिल होंगे, लेकिन गठन के साथ ही यह कमेटी विवादों में भी घिर गई है। प्रदेश प्रभारी पीसी चाको, कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ और देवेंद्र यादव तक इस कमेटी के गठन को लेकर नाराजगी जता चुके हैं, वहीं ज्यादातर प्रत्याशियों ने कमेटी के सदस्यों के चयन पर आपत्ति जताई है। जिन नेताओं को कमेटी का सदस्य बनाया गया है, उनमें से ज्यादातर पर अपने-अपने ही लोकसभा प्रत्याशी को सहयोग एवं समर्थन नहीं करने का आरोप है।

शायद यही वजह रही कि हर लोकसभा क्षेत्र की बैठक के लिए आधे-आधे घंटे तक समय निर्धारित होने के बाद भी पांच सीटों की बैठक ही नहीं हो पाई। नई दिल्ली सीट से न तो प्रत्याशी अजय माकन पहुंचे और न ही उनके दोनों जिलाध्यक्ष वीरेंद्र कसाना व मदन खोरवाल। चांदनी चौक सीट के प्रत्याशी जेपी अग्रवाल और उनके दोनों जिलाध्यक्ष मोहम्मद उस्मान और हरिकिशन जिंदल भी नहीं आए। पूर्वी दिल्ली सीट से प्रत्याशी अरवदिंर सिंह लवली और उनके दोनों जिलाध्यक्ष गुरचरण सिंह राजू व दिनेश कुमार भी नदारद रहे।

पश्चिमी दिल्ली सीट के दोनों जिलाध्यक्ष तो आए, लेकिन प्रत्याशी महाबल मिश्रा नहीं पहुंचे। इसी तरह उत्तर पश्चिमी दिल्ली से प्रत्याशी राजेश लिलोठिया पहुंचे, लेकिन उनके दोनों जिलाध्यक्ष इंद्रजीत और सुरेंद्र कुमार नहीं आए। केवल एक दक्षिणी दिल्ली सीट ही ऐसी थी, जहां से प्रत्याशी विजेंदर सिंह भी पहुंचे और दोनों जिलाध्यक्ष विष्णु अग्रवाल एवं राजेश चौहान भी। हालांकि विजेंदर सिंह को भी प्रदेश कार्यालय पहुंचकर जब यह पता चला कि शीला दीक्षित नहीं आई हैं तो वह नीचे से ही वापस जाने लगे।

एक- दो लोगों ने समझाया तो दस मिनट के लिए कमेटी के समक्ष गए और दो टूक शब्दों में यह कहकर निकल गए कि मेरे इलाके में कांग्रेस के किसी भी नेता ने कोई सहयोग नहीं किया। हैरत की बात यह कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली से प्रत्याशी रहीं शीला दीक्षित और उनके जिलाध्यक्ष भी नहीं आए। बताया गया कि कमेटी के साथ उनकी चर्चा पहले ही हो चुकी है और तो और कमेटी के एक सदस्य परवेज हाशमी भी नदारद रहे।

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