नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। JNU Violence case: देश के नामी संस्थानों में शुमार जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (Jawaharlal Nehru University) में रविवार शाम को हुई हिंसा ने इसकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। दरअसल, अपने स्थापना के समय से ही यह संस्थान वाद-विवाद और अपने शांतिपूर्ण मतभेदों के लिए जाना जाता रहा है। छात्र संघ चुनाव प्रचार के दौरान यहां पर होने वाली डिबेट दुनियाभर में मशूहर है। वहीं, रविवार शाम को हुई हिंसक घटना ने इस छवि को तोड़ दिया है, क्योंकि इस तरह की पहली हिंसक घटना हुई है। जेएनयू के इतिहास में यह पहला मौका है कि जब इस कदर हिंसा हुई। आइए 10 प्वाइंट्स में जानें पूरा मामला।

1. रविवार को हिंसा से पूर्व जेएनयू छात्र संघ की ओर से साबरमती हॉस्टल तक मार्च निकाला जाना था। इसका एलान भी छात्र संघ की ओर पहले ही कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि मार्च निकाले जाने के दौरान विवाद के चलते हिंसा हुई, लेकिन बाद में मुंह पर कपड़ा बांधे कौन लोग आए और उन्होंने जमकर हिंसा की? इसकी जांच होनी बाकी है।

2. जो जानकारी सामने आ रही है कि उसके मुताबिक, पूरा विवाद सर्वर ठंप होने से हुआ था। दरअसल, जेएनयू में फीस, होस्टल फीस आदि मदों में इजाफे को लेकर लंबे समय से संस्थान में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। दो दिन पहले ही शनिवार को जेएनयू छात्र संघ ने सर्वर रूम लॉक कर दिया था, जिसको लेकर छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और जेएनयू छात्र सगंठनों के बीच झड़प हुई थी।

3. काफी पहले से यह चर्चा आम थी कि यहां पर हिंसा हो सकती है। इस बाबत शिकायत तो नहीं की गई, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि यहां पर व्यापक हिंसा हो सकती है। यहां पर लेफ्ट और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच कई बार छोटी मोटी छड़प भी हो चुकी है। ऐसे में इस हिंसक झड़प को भी इसे के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

4. जेएनयू में ABVP के अध्यक्ष दुर्गेश कुमार की मानें तो वामपंथी छात्र संघ ने ही हमारे छात्र संघ के छात्रों के साथ मारपीट की है।

5. कहा जा रहा है कि रविवार को रजिस्ट्रेशन का आखिरी दिन था और अखिल भारतीय छात्र संघ से जुड़े छात्र इसके लिए गए थे, लेकिन इंटरनेट बंद था और रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। इसको लेकर हिंसक विवाद के पीछे की एक वजह बताया जा रहा है।

6. यह भी सामने आ रहा है कि एबीवीपी से जुड़े छात्र विवेकानंद की मूर्ति के पास रजिस्ट्रेशन की मांग कर रहे थे, लेकिन इस बीच छात्रों पर हमला कर दिया गया।

7. एबीवीपी से जुड़े 10 से अधिक छात्रों के लापता होने की बात सामने आ रही है। इस बाबत एबीवीपी छात्र संघ के अध्यक्ष दुर्गेश का कहना है कि पुलिस को छात्रों की तलाश करनी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

8. जेएनयू छात्र की अध्यक्ष आइशी घोष समेत कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई है।

9. कहा जा  रहा है कि साबरमती और अन्य हॉस्टल में ABVP ने एंट्री कर छात्रों की पिटाई की, साथ ही ABVP की ओर से पथराव और तोड़फोड़ भी की गई।

10. छात्र संघ का यह भी आरोप है कि हमलावर नकाब पहने हुए थे, यह सीसीटीवी फुटेज से भी स्पष्ट हो रहा है।

 अंधेरे में लाठी-डंडे लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े छात्र

जेएनयू में रविवार को दिन में टीचर एसोसिएशन की मीटिंग के दौरान छात्रों के दो गुटों में भिड़ंत हो गई। इससे हिंसा भड़की, लेकिन यह थम गई। इसके बाद शाम करीब सात बजे अंधेरे में लाठी डंडों से लैस कुछ छात्र कैंपस में फिर घुसे और यहां मौजूद दूसरे छात्र संगठन से जुड़े छात्रों पर हमला बोल दिया। जिसमें दोनों ओर से कई छात्र घायल हो गए। पूरे परिसर में हंगामा और तोड़फोड़ की गई।

बताया जा रहा है कि करीब 12 से अधिक नकाबपोश लोगों ने लाठी-डंडों से छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष समेत प्रेाफेसर सुचित्र सेन पर हमला कर दिया। जेएनयू प्रशासन से सूचना मिलने पर ज्वाइंट सीपी समेत डीसीपी देवेन्द्र आर्य और साऊथ वेस्ट जिले के सभी थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। पुलिस ने 50 छात्रों को हिरासत में लिया। दो घंटे बाद हालात काबू हुए।

जानकारी के अनुसार, दोपहर से चल रही बैठक के दौरान एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्र एक साथ मौके पर पहुंच गए। इसी दौरान दोनों पक्षों बहस हो गई। देखते ही देखते दोनों ओर से लाठी-डंडे चलने लगे। जेएनयू के अलग-अलग हॉस्टल में भी जमकर तोड़फोड़ की गई है। साबरमती और अन्य हॉस्टल में भी छात्रों की पिटाई की गई।

जेएनयू प्रशासन ने की शिकायत

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : जेएनयू हिंसा मामले में कसूरवार लोगों पर कार्रवाई के लिए वसंत कुंज थाने में जेएनयू प्रशासन ने शिकायत दी है। वहीं जेएनयू के कुलपति प्रो. एम. जगदीश कुमार ने कहा कि प्रशासन जेएनयू में हुई हिंसा की निंदा करता है। यह बहुत ही पीड़ा की बात है कि इस हिंसा के कारण कुछ छात्रों को चोटें आई हैं।

जबरन प्रशासनिक भवन में घुसने की कोशिश

उन्होंने कहा कि छात्रवास की बढ़ाई हुई फीस को वापस करने के लिए कुछ छात्र आंदोलन कर रहे हैं। इन्होंने पंजीकरण की प्रकिया को बाधित किया। इन आंदोलनकारी छात्रों ने पंजीकरण की प्रकिया को रोकने की कोशिश की और जबरन प्रशासनिक भवन में घुसने की भी कोशिश की। जिसके बाद कैंपस में पुलिस को बुलाया गया। कुछ छात्रों के समूह हिंसक गतिविधियों में शामिल होकर प्रदर्शन करते हुए उन छात्रों के अकादमिक गतिविधियों को पूरा होने से रोक रहे हैं जो इसे सुचारू रूप से पूरा करना चाहते हैं।

Posted By: JP Yadav

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