नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। BJP and RSS Top leaders meeting: छत्तरपुर के ध्यान साधना केंद्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक अभी दो दिन तक और चलेगी। बैठक के पहले दिन राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, मनमोहन वैद्य, भैया जी जोशी समेत अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के पदाधिकारी भी शामिल रहे। मीटिंग में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद थे। माना जा रहा है कि अमित शाह बृहस्पतिवार को भी बैठक में शामिल हो सकते हैं।  

जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के मद्देनजर यह बैठक हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद की स्थिति पर विचार- विमर्श हो रहा है। तीन दिन तक चलने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के पदाधिकारी भी शामिल  हैं। इसके अलावा  विभिन्न आनुषांगिक संगठन भी भाग ले रहे हैं। 

ट्विटर पर दी बैठक के बारे में जानकारी 

आरएसएस के आधिकारिक ट्विटर पर कहा गया है कि श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के मुद्दे पर कोर्ट का जो भी फैसला आए उसे सभी को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए। कोर्ट के फैसले के बाद देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे, यह सभी का दायित्व है। इस विषय पर भी बैठक में विचार हो रहा है।

 

पहले हरिद्वार में होनी थी बैठक

अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने बताया कि 30 अक्तुबर से 5 नवंबर तक हरिद्वार में प्रचारक वर्ग के साथ दो दिन की बैठक पहले से निश्चित थी। प्रचारक वर्ग आवश्यक कारणों से स्थगित किया गया है। परंतु बैठक हरिद्वार के स्थान पर अब दिल्ली में हो रही है।

17 नवंबर तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की उम्मीद

बता दें कि अयोध्या भूमि विवाद मामले में 40 दिन चली नियमित सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। माना जा रहा है कि यह फैसला 17 नवंबर तक आ सकता है। दरअसल इस मामले की सुनवाई कर रही पीठ में शामिल मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि नवंबर के मध्य तक फैसला आ सकता है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती

अयोध्या भूमि विवाद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट फैसला दे चुका है। हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। देश की सर्वोच्च न्यायलय में मामले की सुनवाई के दौरान सुलह की कोशिशें भी हुई लेकिन सभी पक्षों में बात नहीं बनी।

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