नई दिल्ली, नेमिष हेमंत। विधानसभा चुनाव बाद बंगाल में जारी हिंसा को एक स्वतंत्र जांच दल ने पूर्व नियोजित और चिन्हित वर्ग पर हमला बताया है। जांच दल ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी को अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट ग्रुप ऑफ इंटलेक्चुअल एंड एकडेमिशंस (जीआइए) की पांच सदस्यीय टीम ने तैयार की है। इस टीम में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा, जीजीएस आईपीयू की प्रोफेसर प्रो.विजेता सिंह अग्रवाल, दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर सोनाली चितालकर और डॉ श्रुति मिश्रा, उद्यमी मोनिका अग्रवाल शामिल थीं।

जीआइए की संयोजक व सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने बताया कि यह रिपोर्ट 20 पीड़ितों से आनलाइन माध्यमों से बातचीत पर आधारित है। इसमें नौ महिलाएं एससी/एसटी, सामान्य वर्ग की नौ महिलाएं तथा दो पुरूष है। इनमें से किसी का नाम इसलिए नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि पहचान उजागर होने पर उनपर सत्तारूढ़ तृणमूल समर्थकों द्वारा हमले का भय है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि बंगाल में लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए आने वाले दिनों में केंद्र सरकार इस मुद्दे पर चर्चा करेगी।

अरोड़ा ने कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस उसी फार्मूले का प्रयोग कर रही है, जो पहले वाम दल करते थे। उसमें स्थानीय स्तर पर विपक्ष की आवाज को हिंसक तरीके से कुचल देना है। इसमें राज्य के प्रशासन तंत्र का खुला इस्तेमाल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि पीड़ितों से बातचीत के आधार पर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे की ये हमले राजनीतिक आधार पर जनसंहार प्रवृत्ति की हैं। इसमें मुख्य तौर से हिंदू समाज के हाशिये पर रह रहे लोगों को धार्मिक, आर्थिक व लैंगिक आधार पर निशाना बनाया गया, जिन्होंने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। उसमें भी महिलाओं के साथ विशेषकर दुष्कर्म, निवस्त्र, पिटाई की लोमहर्षक घटनाएं हुईं।

यह दिए मुख्य सुझाव

-हमलों की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के नेतृत्व विशेष जांच दल (एसआइटी) हो गठित।

- सीमापार आतंकी हमले की भी साजिश की आशंका, लिहाजा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) भी करें जांच।

- पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट को गठन। हिंसा करने वाले हो तत्काल गिरफ्तार। पीड़ितों को मुआवजा व पुर्नवास की व्यवस्था हो। संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूला जाएं जुर्माना। उन पुलिस व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो, जिन्होंने हिंसा करने वालों का साथ दिया।

- टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सत्तारूढ़ दल समर्थित हमलों में नागरिकों के मानवाधिकार हनन के साथ अनुसूचित जाति व जनजाति, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया गया है। ऐसे में इनसे संबंधित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू), राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को भी जांच के साथ राज्य के शीर्ष नौकरशाह को नोटिस जारी करना चाहिए।

 

Edited By: Arun Kumar Singh