मुंबई, प्रेट्र। NCP chief Sharad Pawar. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने घोटाले में घिरे पंजाब एंड महाराष्ट्र कोआपरेटिव (पीएमसी) बैंक के पुनरुद्धार के लिए वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात की है। दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद पवार ने कहा कि बातचीत 'रचनात्मक' रही।

करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने पीएमसी बैंक पर कई तरह का प्रतिबंध लगा दिया है। शुरू में बैंक से निकासी की सीमा 1,000 रुपये तय की गई थी। इससे जमाकर्ता परेशान हो गए और उनमें घबराहट फैल गई। इसके बाद रिजर्व बैंक ने निकासी की सीमा धीरे-धीरे बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी।

पवार ने ट्वीट किया, 'केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर से नई दिल्ली में पीएमसी बैंक के पुनरुद्धार पर बातचीत हुई। हमने इस मुद्दे पर रचनात्मक विचार-विमर्श किया।'

पीएमसी बैंक घोटाला पिछले साल सितंबर में सामने आया था। रिजर्व बैंक को पता चला कि पीएमसी बैंक ने लगभग दिवालिया हो चुकी कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. (एचडीआइएल) को 6,700 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज छिपाने के लिए कथित रूप से बड़ी संख्या में फर्जी खाते बनाए थे। 

रिजर्व बैंक के मुताबिक, पीएमसी बैंक ने कोर बैंकिंग प्रणाली से छेड़छाड़ कर एचडीआइएल सहित करीब 44 ऋण खातों पर पर्दा डाल रखा था। इन खातों को बैंक के कुछ गिने-चुने कर्मचारी ही देख सकते थे। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में केस दर्ज किया है। आर्थिक अपराध शाखा पिछले महीने पांच लोगों के खिलाफ 32,000 पृष्ठ का आरोपपत्र दायर कर चुकी है।

पीएमसी बैंक में एचडीआइएल को गुप्त काउंटर से दी जाती थी नगदी

मिड डे के फैजान खान के मुताबिक, 6,700 करो़ड़ के पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक घोटाले में दाखिल 32 हजार पन्नों के आरोप-पत्र में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आरोप-पत्र में बताया है कि पीएमसी बैंक मुख्यालय में एचडीआइएल के प्रतिनिधियों व बैंक अधिकारियों को नकदी देने के लिए गुप्त कैश काउंटर संचालित किए जा रहे थे।

आरोप-पत्र के अनुसार, वर्ष 2013-14 के बीच नाहुर में मैजेस्टिक टावर और व्हिस्परिंग टावर के काम को पूरा करने के लिए नगदी प्रदान की गई। इन परियोजनाओं के लिए रियल एस्टेट कंपनी एचडीआइएल को कुल 22.32 करो़ड़ रुपये दिए गए थे। वर्ष 2014-19 के बीच एचडीआईएल और उसकी सहयोगी कंपनियों को 65.29 करो़ड़ रुपये का भुगतान किया गया।

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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