जागरण संवाददाता, कोलकाता। बंगाल में दुर्गा पूजा अब राजनीतिक दलों के लिए जनसंपर्क बढ़ाने का जरिया बनने वाला है। भाजपा के बाद अब तृणमूल भी दुर्गा पूजा को जनसंपर्क अभियान बढ़ाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगी। हालांकि इसके लिए पार्टी किसी बैनर, पोस्टर का सहारा नहीं लेगी। सोमवार को हुई सांगठनिक बैठक में तृणमूल प्रमुख व राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सांसदों, मंत्रियों, विधायकों के साथ जिलों के सभी नेताओं के लिए होमटास्क निर्धारित कर दिया है।

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मौजूदगी में हुई बैठक में तृणमूल प्रमुख ने नेताओं को पूजा में मौज मस्ती करने बाहर घुमने जाने से मना करते हुए कहा कि दीदी के बोलो अभियान को और मजबूत करने पर काम करना होगा। समझा जाता है कि उनके द्वारा निर्धारित दिशा निर्देश के आधार पर ही ममता ने पार्टी नेताओं को पूजा का होमटास्क निर्धारित किया है।

 पूजा भ्रमण नहीं, इलाके में रहकर बढ़ाना होगा जनसंपर्क

इस दिन बैठक में ममता बनर्जी ने नेताओं को दुर्गा पूजा के दौरान कई दिशा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान कहीं भी घुमना नहीं है बल्कि अपने क्षेत्र में रहकर ही लोगों से जनसंपर्क बढ़ाना होगा। इतना ही नहीं उन्होंने दीदी के बोलो अभियान को और मजबूत करने पर जोर दिया और नेताओं को इसे गंभीरता से लेने को कहा। सीएम ने कहा कि पूजा पंडाल में किसी भी तरह का पार्टी से जुड़ा हुआ पोस्टर व बैनर नहीं लगाना होगा।

सीबीआइ तलब करे तो पहुंचे नेता

ममता ने नेताओं को कहा कि यदि सीबीआइ की ओर से किसी नेता, मंत्री अथवा सांसद को तलब किया जाता है तो वे पहुंचे। जांच में सहयोग करें जो हुआ है और जो हो रहा है उसकी सच्चाई सीबीआइ अधिकारियों के समक्ष रखें। ममता ने कहा कि इसमें किसी भी तरह से भयभीत होने की जरूरत नहीं है और वे अपने नेताओं के साथ हैं।

सांसदों से मांगी पिछड़ी जाती से जुड़े 15 कार्यकर्ताओं की सूची

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र से 10 अनुसूचित जाति व पांच अनुसूचित जनजाति से जुड़े कार्यकर्ताओं की सूची जमा करने को कहा। उन्होंने सभी सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि आप महीने में पांच-पांच की सूची भी सौंपते हैं तो हम इसे लेकर आगे काम की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं। ममता ने सांसदों को कहा कि सभी सांसदों को कहीं भी जाना पड़ सकता है इसके लिए वे तैयार रहें। समझा जाता है कि अब सांसदों को दीदी के बोलो अभियान के तहत अपने संसदीय क्षेत्र में चयनित संसदीय क्षेत्र में जाने को कहा जा सकता है।

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