लखनऊ, जेएनएन। उन्नाव के ट्रांस गंगा प्रोजेक्ट में बढ़ी दर से भूमि का मुआवजा मांग रहे किसानों पर पुलिस के लाठीचार्ज से राजनीतिक गर्माहट बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने उत्तर प्रदेश की सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा को किसान विरोधी करार दिया है। समाजवादी पार्टी के बाद अन्य दलों के नेता भी मौके पर जाकर पीड़ित किसानों से मिल रहे हैं। ट्विटर पर भी सरकार विरोधी बयानों का सिलसिला तेज हो गया है। 

किसानों पर लाठीचार्ज निंदनीय : मायावती

बसपा प्रमुख मायावती ने ट्वीट किया कि 'उप्र सरकार को उन्नाव में पिछले कई दिनों से चल रहे जमीन मुआवजे के विवाद व हिंसा के लगातार उलझते जा रहे मामले को जमीन मालिकों के साथ बैठकर जल्दी सुलझाना चाहिए ना कि उनके ऊपर पुलिस लाठीचार्ज व उनका शोषण कराना चाहिए जो अति-निंदनीय है। इसे सरकार को अति गंभीरता से लेना चाहिये।'

मुआवजे के बदले किसानों को लाठी : अखिलेश

समाजवादी पार्टी उन्नाव प्रकरण को लेकर अधिक मुखर है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर सोमवार को पार्टी का एक जांच दल विधान परिषद में दल नेता अहमद हसन के नेतृत्व में पीड़ित किसान परिवारों से मिला। अखिलेश ने किसानों के हक की लड़ाई मजबूती से लड़ने की घोषणा की है। उन्होंने ट्वीट किया कि 'उत्तर प्रदेश में किसानों को ट्रांस गंगा सिटी प्रोजेक्ट की जमीन के उचित मुआवजे की जगह भाजपा की लाठी मिल रही है, गन्ने का मूल्य नहीं मिल रहा, खड़ी फसल आवारा पशु खा रहे हैं, देश में अन्नदाताओं की आत्महत्याएं बढ़ती जा रही हैं... क्या भाजपा के राज में विकास की यही परिभाषा है।'

कांग्रेस ने बनाई समिति

ट्रांस गंगा सिटी में किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर कांग्रेस भी आगे आ गई है। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने एक जांच समिति का गठन किया है, जिसमें कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा, विधायक सुहेल अंसारी, प्रदेश महासचिव राकेश सचान, मनोज यादव, प्रदेश सचिव विवेकानंद पाठक और उन्नाव जिलाध्यक्ष सुभाष सिंह शामिल हैं। यह समिति उन्नाव जेल जाकर वहां निरुद्ध किसानों से मुलाकात करेगी और पूरे मामले की रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेगी।

किसान सरकार के लिए दंगाई : जयंत

राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के लिए किसान दंगाई व आतंकवादी जैसे हो गए हैं। उन्होंने किसानों पर लाठियां बरसाते हुए फोटो के साथ ट्वीट किया कि 'ये बहुत दर्दनाक दृश्य हैं। हमारा लोकतंत्र लाठी के बल पर टिका है क्या? हमें पता है किसान इस सरकार के लिए दंगाई हैं, आतंकवादी हैं, एंटी नेशनल हैं। और उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी बताएं, यह दंगा कंट्रोल का प्रोटोकाल है क्या?'

किसानों और पुलिस के बीच हुआ था संघर्ष

उन्नाव जिले की ट्रांस गंगा सिटी में मुआवजे की मांग कर रहे किसानों का आक्रोश शनिवार को निर्माण की तैयारी देख फूट पड़ा था। किसानों ने साइट पर उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के महाप्रबंधक अभियंत्रण को घेर लिया। मजदूरों को भी भगा दिया। बस, कार व जेसीबी में तोड़फोड़ की। जेसीबी चालक घायल हो गया। बिगड़ते हालात देख पीएसी और 13 थानों के फोर्स ने मोर्चा संभाला। समझाने की कोशिशों के बीच पथराव शुरू हो गया तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। आंसू गैस के गोले भी छोड़े। पथराव में सीओ सिटी, एएसपी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। लाठीचार्ज में 15 किसान घायल हो गए। आंदोलन की अगुवाई करने वाले किसान नेता गिरफ्तार कर लिया गया।

Posted By: Umesh Tiwari

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