कोलकाता, जागरण संवाददाता। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चौथे दिन शुक्रवार को बंगाल के करीब एक दर्जन सरकारी अस्पतालों के 700 से अधिक डॉक्टरों के सामूहिक रूप से इस्तीफा देने से हड़कंप मच गया। वहीं बंगाल में स्वास्थ्य सेवाएं पिछले तीन दिनों की तरह ही अस्त-व्यस्त रहीं। अस्पतालों के आउटडोर बंद हैं। बहुत से मरीज व उनके परिजन रोजाना उम्मीद लिए अस्पतालों में पहुंच रहे हैं और बिना इलाज लौट रहे हैं। शुक्रवार को आरजी कर अस्पताल में बिना इलाज के दो बच्चों की मौत हो गई। चिकित्सा के अभाव में अब तक पांच जानें जा चुकी हैं।

इस बीच एनआरएस अस्पताल से शुरू हुई आंदोलन की आग देशभर में फैल गई है। झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में डॉक्टर शुक्रवार को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल में शामिल हुए। आंदोलन की गूंज विदेश में भी पहुंच गई है। टोक्यो स्थित व‌र्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन ने भी डॉक्टरों की आंदोलन का समर्थन किया है।

आंदोलन की खास बातें -

-बंगाल में पांचवें दिन भी अस्त-व्यस्त रहीं स्वास्थ्य सेवाएं, बिना इलाज दो और मौतें

--हड़ताल के बीच 700 से ज्यादा डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे से हड़कंप

-देशभर में फैली एनआरएस अस्पताल से शुरू हुई आंदोलन की आग

-विभिन्न राज्यों में एक दिन की सांकेतिक हड़ताल में शामिल हुए डॉक्टर

-केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षव‌र्द्धन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, राज्यपाल ने ममता को बातचीत के लिए बुलाया

-कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से हालात पर मांगी रिपोर्ट

-आंदोलनकारी डॉक्टरों ने हड़ताल से हटने के लिए मुख्यमंत्री के सामने रखीं माफी समेत छह शर्तें

-बुद्धिजीवी वर्ग भी आया समर्थन में, डाक्टरों से मिला, निकाला जुलूस

-एसएसकेएम अस्पताल में दिए बयान को लेकर क्षुब्ध हैं डॉक्टर

किस अस्पताल में कितने डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा

एसएसकेएम अस्पताल-215

एनआरएस मेडिकल कालेज अस्पताल-109

आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल -126

उत्तर बंगाल मेडिकल कालेज अस्पताल-119,

रामपुरहाट मेडिकल कालेज अस्पताल-37

मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल-32

मालदा मेडिकल कालेज अस्पताल-38

नेशनल मेडिकल कॉलेज अस्पताल-35,

ट्रापिकल साइंसेज-37

आंदोलनकारी डॉक्टर हड़ताल पर अडिग

इन सबके बीच आंदोलनकारी डॉक्टर हड़ताल पर अडिग हैं। उन्होंने हड़ताल से हटने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने माफी मांगने समेत छह शर्तें रखी हैं, जिनमें ममता का एनआरएस आकर उनसे मिलना, हमले में जख्मी डॉक्टर परिबाह मुखर्जी को देखने जाना, एसएसकेएम अस्पताल में दिए गए बयान को वापस लेना एवं अस्पतालों में डाक्टरों की पर्याप्त सुरक्षा का लिखित रूप से आश्वासन देना प्रमुख हैं। गंभीर हालात को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षव‌र्द्धन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले में व्यक्तिगत तौर पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। वहीं राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने भी मुख्यमंत्री को मसले पर विचार-विमर्श करने के लिए देर शाम राजभवन बुलाया। इस बीच जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि उसने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं।

जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में बुद्धिजीवी वर्ग भी आगे आया है। बुद्धिजीवियों ने आंदोलन के समर्थन में शुक्रवार को महानगर में जुलूस भी निकाला। इस दिन चर्चित फिल्म निर्देशक अपर्णा सेन, अभिनेता कौशिक सेन, संगीतकार देवज्योति मिश्रा समेत समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट लोगों ने एनआरएस अस्पताल जाकर आंदोलनकारी डॉक्टरों से मुलाकात की। अपर्णा सेन ने जूनियर डॉक्टरों की मांगों को जायज ठहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को बिना किसी शर्त के डॉक्टरों से बातचीत करनी चाहिए।

उधर मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर विरोधी दल भाजपा और माकपा पर फिर आरोप लगाते हुए कहा कि वे डॉक्टरों को भड़का कर मामले को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं। दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी एवं शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने एक बार फिर आंदोलनकारी डॉक्टरों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की।

इस्तीफे नहीं होंगे मंजूर

इस बीच राज्य प्रशासन की ओर से संकेत मिले हैं कि सरकारी डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे मंजूर नहीं किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सामूहिक रूप से इस्तीफा देना वैध नहीं है। किसी भी डॉक्टर की नियुक्ति के समय व्यक्तिगत रूप से नियुक्ति पत्र दिया जाता है इसलिए उनका व्यक्तिगत इस्तीफा ही वैध होगा। सामूहिक इस्तीफा वैध नहीं हो सकता इसीलिए उन्हें स्वीकारा नहीं जा सकता।

जूनियर डॉक्टरों के संयुक्त मंच के प्रवक्ता डॉ अरिंदम दत्ता ने कहा

बंगाल में आंदोलनकारी चिकित्सकों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री व राज्य की स्वस्थ्य मंत्री ममता बनर्जी से सशर्त माफी मांगने की मांग की और चार दिनों से चल रहे अपने आंदोलन को वापस लेने के लिए राज्य सरकार के लिए छह शर्तें तय की। चिकित्सकों के इस आंदोलन ने समूचे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित कर दिया है। जूनियर डॉक्टरों के संयुक्त मंच के प्रवक्ता डॉ अरिंदम दत्ता ने कहा, 'एसएसकेएम हॉस्पिटल में कल जिस तरह से मुख्यमंत्री ने हमें संबोधित किया था, उसके लिए हम उनसे यह मांग करते हैं कि वह सशर्त माफी मांगें। उन्हें वह नहीं कहना चाहिए था, जो उन्होंने कहा था।'

ममता ने गुरुवार को एसएसकेएम अस्पताल का दौरा किया था, जहां उन्होंने कहा कि बखेड़ा खड़ा करने के लिए बाहरी लोग मेडिकल कॉलेजों में घुसे थे और आंदोलन माकपा एवं भाजपा की साजिश है। आंदोलनकारियों ने छह शर्तें गिनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को अस्पताल जाकर घायल डॉक्टरों से मिलना चाहिए और उनके कार्यालय को उन पर (डॉक्टरों पर) हुए हमले की निंदा करते हुए एक बयान जारी करना चाहिए। उन्होंने कहा,'हम मुख्यमंत्री के फौरन हस्तक्षेप की भी मांग करते हैं।' साथ ही सोमवार रात डॉक्टरों को सुरक्षा मुहैया करने में पुलिस की निष्कि्रयता के खिलाफ न्यायिक जांच के दस्तावेज साक्ष्य भी मुहैया किया जाए।

गौरतलब है कि एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में सोमवार रात एक रोगी के परिवार के सदस्यों ने दो जूनियर डॉक्टरों से मारपीट की थी। दरअसल, अस्पताल में इस रोगी की मौत हो गई थी। दत्ता ने कहा, 'हम हमलावरों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा भी देने की मांग करते हैं।' उन्होंने आंदोलन के मद्देनजर जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के खिलाफ समूचे राज्य में दर्ज किए गए झूठे मामलों और आरोपों को सशर्त वापस लेने तथा सभी मेडिकल कॉलेजों में सशस्त्र बल के कर्मियों को तैनात करने की भी मांग की।

बोला मृतक शाहिद का परिवार- मामला इतना आगे निकल जाएगा, पता नहीं था 

एनआरएस अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बाद देश भर में हंगामा बरपा है। जिस मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद यह बवाल शुरू हु्आ, उनके परिजनों को उम्मीद भी नहीं थी कि मामला इस कदर बिगड़ जाएगा।

नीलरतन सरकार अस्पताल से मात्र दो किलोमीटर दूर टेंगरा के बीबी बागान लेन स्थित जामा मस्जिद के पास शाहिद अपने दो बेटों व एक बहू के साथ रहते थे। पिछले सोमवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हुई। मौत के बाद परिजनों ने वहां कार्यरत डॉक्टरों के साथ हाथापाई की। इसमें एक जूनियर डॉक्टर गंभीर रूप से जख्मी हो गया। उसके बाद मचे बवाल से राज्य के साथ देश भर की चिकित्सा व्यवस्था जख्मी है।

शाहिद के छोटे बेटे मोहम्मद साबीर ने बातचीत में स्पष्ट कहा, माना सारी गलती हमारी है। लेकिन हमें उम्मीद नहीं थी मामला इतनी दूर चला जाएगा। उसके सुर में सुर मिलाते हुए स्थानीय नागरिकों ने भी कहा, कि जो होना था हो गया, अब इसकी वजह से अन्य रोगियों की मौत नहीं होनी चाहिए। बड़ा बेटा मोहम्मद इसराइल जामा मस्जिद में इमाम है। इलाके के लोग भी डरे हुए हैं। स्थानीय एक नागरिक ने कहा, अस्पतालों में जो हो रहा है उससे बहुत डर लग रहा है। अगर कुछ बड़ा हादसा हो गया तो शायद हम यहां रह नहीं पाएंगे।

बातचीत के दौरान सबीर ने अपने पिता के इलाज में भयानक लापरवाही का भी आरोप लगाया। उसने यहां तक कहा कि डॉक्टरों ने उसके पिता की लाश को घंटों रोके रखा। यही नहीं मृत देह छोड़ने के एवज में उनके सामने माफी मांगने की शर्त रखी गई। स्थानीय थाने की पुलिस भी डॉक्टरों को समझाने पहुंची लेकिन वे नहीं माने। सबीर का दावा है कि उसके बाद ही उसके परिजनों को गुस्सा आ गया, जिसमें उन्होंने पत्थरबाजी की। 

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Posted By: Preeti jha

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