जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में कांग्रेस अपनी हार को हार नहीं मानती। कांग्रेस के रणनीतिकारों की सोच है कि हार तो भाजपा की हुई है। कांग्रेस ने पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार 16 सीटों की बढ़ोतरी दर्ज की, जबकि 75 सीटें जीतने का नारा देने वाली भाजपा की सात सीटें कम हुई हैैं। कांग्रेस पर्यवेक्षक मधुसूदन मिस्त्री और प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद की मौजूदगी में शुक्रवार को हुई हरियाणा कांग्रेस विधायक दल की बैठक में हाईकमान को त्वरित फैसले लेने की नसीहत भी दी गई। बैठक में पराजित उम्मीदवार भी शामिल हुए। 

राज्यस्तरीय आंदोलन के लिए पर्यवेक्षक बनाए गए योगानंद शास्त्री समेत कई विधायकों ने कहा कि यदि भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कमान सौंपने का फैसला समय से हो जाता तो नतीजे और भी सुखद होते। बैठक में मधुसूदन मिस्त्री ने सभी विधायकों से अलग-अलग फीडबैक भी लिया। कुछ ने चुनाव में हार की वजह बताई तो कुछ ने वोट फीसद में बढ़ोतरी की दुहाई देते हुए हुड्डा व सैलजा के नेतृत्व पर मुहर लगाई। अधिकतर विधायकों ने हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाने का फीडबैक दिया।

बैठक के बाद खुद हुड्डा ने माना कि यदि समय रहते जिम्मेदारी मिल गई होती तो नतीजे चौंकाने वाले होते। बैठक में 7 से 14 नवंबर तक केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारों के विरुद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की गई। राष्ट्रीय स्तर पर कमजोर अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी और व्यापारिक संधियों के खिलाफ आंदोलन होगा, जबकि हरियाणा में धान की खरीद नहीं होने और मंडियों में किसानों की दुर्दशा के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।

धरने-प्रदर्शनों के लिए योगानंद शास्त्री संयोजक नियुक्त 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कु. सैलजा के अनुसार एक सप्ताह तक चलने वाले धरने-प्रदर्शनों के लिए योगानंद शास्त्री को प्रदेश संयोजक नियुक्त किया गया है। जिला स्तर पर धरनों की बागडोर विधायकों और हारे हुए प्रत्याशियों के हाथ में होगी। सैलजा के अनुसार 15 नवंबर को दिल्ली में भाजपा के खिलाफ धरना दिया जाएगा। अगले तीन दिनों तक राज्य में आंदोलनों की तैयारी होगी। 7 नवंबर से प्रदर्शन शुरू हो जाएंगे।

धरातल पर संगठन होता तो कांग्रेस बनाती सरकार : हुड्डा 

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने माना कि इस बार विधानसभा चुनाव बगैर संगठन के लड़ा गया। कार्यकर्ता खुद मानसिक रूप से हारे हुए थे। अगर थोड़ा और जोर लगाते और धरातल पर संगठन होता तो कांग्रेस हरियाणा में सरकार बना सकती थी। प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने सभी कांग्रेस नेताओं से मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने की अपील की है। कांग्रेस पूरी एकजुटता के साथ भाजपा सरकार को सदन के भीतर और बाहर घेरने का काम करेगी।

विधायकों व पूर्व विधायकों को आंदोलनों की जिम्मेदारी 

जिला स्तरीय आंदोलनों के लिए अंबाला में पूर्व मुख्य संसदीय सचिव राम किशन गुर्जर, भिवानी में पूर्व विधायक सोमवीर सिंह, दादरी के लिए पूर्व विधायक मेजर नृपेंद्र सिंह, फरीदाबाद के लिए पूर्व विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया संयोजक होंगे। फतेहाबाद के लिए पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, गुरुग्राम में पूर्व विधायक सुखबीर कटारिया, झज्जर में विधायक डॉ. रघुबीर सिंह कादियान और जींद में विधायक सुभाष देशवाल संयोजक होंगे।

हिसार में विधायक कुलदीप बिश्रोई, करनाल में स. त्रिलोचन सिंह, कुरुक्षेत्र में पूर्व विधायक अशोक अरोड़ा, कैथल में पूर्व विधायक जय प्रकाश जेपी और महेन्द्रगढ़ में विधायक राव दान सिंह संयोजक बनाए गए। आफताब अहमद, चंद्रमोहन, धरम सिंह छोक्कर, करण सिंह दलाल, कैप्टन अजय सिंह यादव, बीबी बत्रा, डा. केवी सिंह, कुलदीप शर्मा और बिशन लाल सैनी को नूंह, पंचकूला, पानीपत, पलवल, रेवाड़ी, रोहतक, सिरसा, सोनीपत व यमुनानगर की जिम्मेदारी दी गई है। 

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