लखनऊ, जेएनएन। मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन से हर महीने 500 रुपये कटौती करने के आदेश पर राज्य कर्मचारियों में उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश के आधार पर बस्ती के जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने भी अधीनस्थों को पत्र जारी कर दिया, लेकिन कर्मचारियों ने जब विरोध की चेतावनी दी तो शनिवार शाम तक डीएम ने संबंधित आदेश वापस लेकर गलती भी मान ली।

इस मामले पर बवाल डीएम बस्ती के 11 दिसंबर के उस पत्र से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के चार दिसंबर के पत्र का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष के लिए प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी के वेतन से पांच सौ रुपये की कटौती कर लखनऊ की एक बैंक में रकम जमा कराने की अपेक्षा अधीनस्थ अधिकारियों से जताई थी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्र ने बताया कि वाराणसी और चंदौली सहित कई अन्य जगहों से भी उन्हें शासन द्वारा ऐसा पत्र भेजे जाने की जानकारी मिली है। परिषद ने शनिवार को प्रदेशभर में संपर्क करने के बाद दोपहर में आपात बैठक बुलाई और इसे तुगलकी फरमान ठहराते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आदेश वापस लेने की चेतावनी दी। कर्मचारियों ने इस कटौती से सरकार के पास हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान लगाया है।

राज्य कर्मचारियों द्वारा विरोध की चेतावनी के बाद बस्ती के जिलाधिकारी का एक और पत्र शनिवार शाम तक सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसमें उन्होंने 500 रुपये की कटौती के आदेश को लिपिकीय त्रुटि ठहराते हुए आदेश वापस ले लिया। हालांकि इस पत्र में भी जिलाधिकारी ने कहा कि जो अधिकारी-कर्मचारी स्वेच्छा से इसमें सहभागिता करना चाहते हों, वे अंशदान कर सकते हैं। निरंजन ने विभागीय कर्मियों से इस कोष की जानकारी आमजनों तक पहुंचाने के प्रयास करने का भी आग्रह किया है। दूसरी तरफ संयुक्त परिषद ने दावा किया कि विरोध की चेतावनी के बस्ती डीएम ने बैकफुट पर आकर आदेश वापस लिया है। परिषद ने अब इस मामले को सोमवार को शासन स्तर पर ले जाने की तैयारी की है। 

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