नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। छत्तीसगढ के जबरदस्त नक्सली हमले पर कांग्रेस ने रमन सिंह सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि जवानों की शहादत के बाद मुख्यमंत्री को क्षण भर भी कुर्सी पर रहने का अधिकार नहीं है।

वहीं जम्मू-कश्मीर में बढ़ी आतंकी हिंसा को लेकर पार्टी ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि भाजपा की ढुलमुल नीतियों के चलते सूबे की हालत सबसे खराब दौर में पहुंच गई है। नोटबंदी के जरिये आतंकवादियों और नक्सलियों की कमर तोड़ने के प्रधानमंत्री के दावों के ध्वस्त होने को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगते हुए उसे घेरा।

चुनाव अभियान के बीच छत्तीसगढ में शनिवार को हुए नक्सली हमले में चार जवानों की शहादत पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सीएम रमन सिंह कायर ही नहीं डरपोक भी हैं और उन्हें क्षण भर भी कुर्सी पर रहने का नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ सरकार ने नक्सलियों के सामने घुटने टेक दिये हैं और भाजपा देश की आतंरिक सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है।

नक्सली विस्फोट में चार जवानों के शहीद होने को दर्दनाक करार देते हुए सिंघवी ने कहा कि 2012 से अब तक नक्सली हमले छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़े हैं। 2017 में 130 से अधिक लोगों की नक्सली हमले मे मौत हुई जबकि मौजूदा साल में यह संख्या इससे भी ज्यादा हो चुकी है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि नोटबंदी लागू करने के पक्ष में पीएम मोदी ने देश को भरोसा दिया था कि कालेधन के साथ नक्सली और आतंकी हिंसा की कमर भी टूट जाएगी। मगर छत्तीसगढ में नक्सलवाद का कहर लगातार जिस तरह गंभीर हो रहा है और जम्मू-कश्मीर में आतंकी हिंसा के चलते बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौत हो रही है उसे साफ है कि यह दावा झूठा साबित हुआ है।

सिंघवी ने कहा कि नोटबंदी के बाद 30 से अधिक बड़े नक्सली हमले हो चुके हैं जिनमें हमारे 120 से ज्यादा जवान शहीद हुए हैं और 150 नागरिकों की इन हमलों में मौत हुईं। जम्मू-कश्मीर में नोटबंदी के बाद 70 के करीब बड़े आतंकी हमलों में 120 जवानों की शहादत हुई है और 70 से अधिक नागरिक मारे गए हैं।

नक्सलवाद से लड़ने की केंद्र की रणनीति पर सवाल दागते हुए सिंघवी ने कहा कि इसका बड़ा प्रमाण प्रसिद्ध पुलिस प्रशासक रहे केपीएस गिल का वह बयान है जिसमें उन्होंने रमन सिंह सरकार की पोल खोली थी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यूपीए सरकार ने नक्सल प्रभावित 88 जिलों के लिए विशेष समन्वित योजना की शुरूआत की थी और 2013-14 में इसके लिए 13000 करोड रुपये का फंड भी दिया था मगर एनडीए सरकार ने इस योजना को ही बंद कर दिया। इसी तरह 250 पिछड़े जिलों जिसमें नक्सल प्रभावित जिले भी शामिल थे उनके लिए चलाई गई पिछड़े क्षेत्र अनुदान योजना को भी इस सरकार ने ध्वस्त कर दिया।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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