कोलकाता, जागरण संवाददाता। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। बाहुबल से इसे लागू करने नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने ये बात कही। उन्होंने छात्रों से सड़क पर उतरकर और घर-घर जाकर सीएए व राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ लोगों को जागरूक बनाने को कहा। साथ ही भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में भाजपा के नेता सक्रिय होकर लोगों को सीएए-एनआरसी के बारे में गलत जानकारी देकर बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष और प्रदेश प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा-'एक को चाय की दुकान पर लोगों को सीएए-एनआरसी के बारे में बताना पड़ रहा है तो दूसरा यहां के लोगों के खानपान पर टिप्पणी कर रहा है। हम बंधुआ मजदूर नहीं हैं, बल्कि भारत के नागरिक हैं। हम अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त करेंगे। साथ ही यह भी तय करेंगे हमारे लिए क्या सही है और क्या गलत?' आगे की रणनीति की जानकारी देते हुए ममता ने कहा कि 31 जनवरी से छात्र संगठन रानी रासमणि रोड में जारी विरोध-प्रदर्शन की कमान संभालेगा और एक-दो फरवरी को सीएए-एनआरसी के विरोध में राज्यभर में जुलूस निकाला जाएगा। पांच फरवरी को सीएए-एनआरसी के खिलाफ पार्टी की ओर से ब्लॉक स्तर पर मानव श्रृंखला बनाकर विरोध किया जाएगा। छह फरवरी को हाथों में सीएए-एनआरसी विरोधी तख्तियां लिए पार्टी कार्यकर्ता मौन जुलूस निकालेंगे। सात फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण के बाद बजट अधिवेशन होगा और आठ और नौ फरवरी को पार्टी प्रतिनिधि ब्लॉक स्तर पर एससी-एसटी समुदाय के लोगों के घर जाकर उनकी समस्याओं पर उनसे चर्चा करेंगे। 10-13 फरवरी तक पार्टी के नेता बूथ स्तर पर बैठक करेंगे। ममता ने कहा कि देश का भविष्य अगली पीढ़ी के हाथों में है इसलिए बड़े उनके लिए जगह छोड़कर पीछे आ गए हैं। ममता ने कहा कि गुटबाजी में न पड़कर नि:स्वार्थ तरीके से पूरे मन से पार्टी के लिए काम करें।

ममता ने 'पोहा' वाले बयान को लेकर विजयवर्गीय पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार 'पोहा' वाले बयान को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भगवा पार्टी के नेताओं को खान-पान की आदतों और पहनावे पर टिप्पणी करने का अधिकार किसने दिया? गौरतलब है कि विजयवर्गीय ने इंदौर में एक सम्मेलन में कहा था कि उन्हें संदेह है कि उनके घर पर काम करने श्रमिकों में बांग्लादेशी भी थे क्योंकि वे पोहा खा रहे थे। मजदूरों के खाने-पीने की आदत ने उनकी राष्ट्रीयता को लेकर संदेह पैदा किया है। इस बयान को लेकर तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद की कार्यशाला में ममता ने विजयवर्गीय पर हमला बोला। उन्होंने कहा-'उन्हें किसने ऐसी टिप्पणी करने का अधिकार दिया? क्या आप किसी को पोहा खाते देखकर उसकी राष्ट्रीयता निर्धारित कर सकते हैं? क्या आप किसी की राष्ट्रीयता उसके पहनावे के आधार पर बता सकते हैं?' इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल झारखंड में एक चुनाव रैली के दौरान कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून को लेकर आगजनी कर रहे हैं, उन्हें उनके कपड़ों से पहचाना जा सकता है।

ममता ने दोहराया कि वह बंगाल में एनपीआर प्रक्रिया तब तक नहीं होने देंगी, जब तक कि प्रपत्र में जरूरी सुधार नहीं कर लिए जाते। उन्होंने सवाल किया-'ऐसा क्यों है कि लोगों से एनपीआर के लिए परिजन का पता और जन्म प्रमाणपत्र देने को कहा जा रहा है? भाजपा पर दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा-'कुछ लोग सिर्फ एक रंग का अस्तित्व चाहते हैं, लेकिन हमारा देश सभी रंगों से बना खूबसूरत चित्र है।'

 

Posted By: Preeti jha

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