लखनऊ, जेएनएन। आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की कुर्सी संभाल ली। इसके बाद शाम को निवर्तमान राज्यपाल राम नाईक अमौसी स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से परिवार के साथ मुम्बई रवाना हो गए। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही बड़ी संख्या में मंत्री, अफसर और राजभवन के अधिकारी आदि उपस्थित रहे। राजभवन से एयरपोर्ट के लिए निकलते वक्त राज्यपाल आनंदीबेन, राम नाईक को राजभवन के पोर्टिको तक छोड़ने आईं। 

राम नाईक ने राजभवन छोड़ने से पहले एक और परम्परा तोड़ी

यूं तो संयुक्त प्रांत और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पद के लिए 33 शपथ ग्रहण समारोह पहले हो चुके हैं, लेकिन सोमवार को 34वें राज्यपाल के तौर पर आनंदीबेन पटेल का शपथ ग्रहण समारोह पहले वालों से कुछ अलग ही था। पहले की परम्परा को तोड़ते हुए पहली बार ऐसा हुआ कि नए राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में निवर्तमान राज्यपाल भी मौजूद रहे।

दरअसल, अब तक यही परम्परा रही है कि नए राज्यपाल के आने से पहले ही निवर्तमान राज्यपाल राजभवन को छोड़ देते थे। राम नाईक ने इस रूढ़ि को ठीक न मानते हुए कहा कि जब राष्ट्रपति के मामले में ऐसी कोई परम्परा नहीं है तो यहां भी इसे बदलना है। ऐसे में भले ही नाईक का पांच वर्ष का कार्यकाल 22 जुलाई को पूरा हो चुका था और उससे पहले 20 जुलाई को ही आनंदीबेन को यहां का राज्यपाल बनाने का आदेश आ गया था, लेकिन नाईक ने राजभवन नहीं छोड़ा। नियमानुसार इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन पहले से चली आ रही परम्परा टूटी।

सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल रहते राम नाईक, आनंदीबेन के साथ गांधी सभागार में पहुंचे। मंच पर पहुंचते ही वहां रखी तीन कुर्सियों में नाईक बीच वाली पर बैठ गए। नाईक के एक तरफ मुख्य न्यायाधीश और दूसरी तरफ वाली कुर्सी पर आनंदीबेन बैठीं। मुख्य न्यायाधीश द्वारा शपथ दिलाए जाने के बाद नाईक अपनी कुर्सी से उठकर किनारे वाली उस कुर्सी पर आ गए जहां आनंदीबेन बैठी थी। शपथ और हस्ताक्षर के बाद आनंदीबेन बीच वाली कुर्सी पर बैठ गईं।

राष्ट्रगान के साथ शपथ ग्रहण समारोह के समाप्त होने के बाद नाईक, आनंदीबेन को लेकर राजभवन स्थित राज्यपाल के कार्यालय में भी पहुंचे। आनंदीबेन के राज्यपाल की कुर्सी संभालने के बाद नाईक उन्हें लेकर राजभवन के प्रथम तल पर पहुंचे। नाईक ने आनंदीबेन को दोपहर का भोज (लंच) कराया और उसके बाद खुद परिवार के साथ राजभवन से मुम्बई के लिए एयरपोर्ट रवाना हो गए।

राज्यपाल के तौर पर अपने पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान राम नाईक ने कई और परम्पराओं को भी तोड़ा और बहुत कुछ नया शुरू किया। नाईक ने राज्यपाल को महामहिम कहने के बजाय माननीय कहलाने की व्यवस्था भी लागू की।

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Posted By: Umesh Tiwari

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