कोलकाता, जागरण संवाददाता। Cyclone Bulbul. केंद्रीय राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो की तरह केंद्रीय महिला व बाल विकास राज्यमंत्री देवश्री चौधरी को भी दक्षिण 24 परगना जिले में विरोध का सामना करना पड़ा। वे शुक्रवार को चक्रवात 'बुलबुल' से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए गोसाबा पहुंची थीं। उन्हें देखते ही कुछ तृणमूल कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को लक्ष्य कर 'गो बैक' के नारे लगाए। विरोध-प्रदर्शन में केंद्रीय मंत्री के साथ कई भाजपा नेता भी फंसे रहे।

आरोप है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री के लिए बने मंच को भी तोड़ दिया। उन पर मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं को मारने-पीटने का भी आरोप है। इस दिन केंद्रीय राज्यमंत्री स्टीमर से इलाकों का निरीक्षण कर रहीं थीं। उनके गोसाबा घाट पर उतरने के पहले ही सत्तारूढ़ दल के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। बुधवार को क्षतिग्रस्त इलाकों का जायजा लेने पहुंचे केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को भी विरोध का सामना करना पड़ा था। शुक्रवार को देवश्री चौधरी के साथ उस घटना की पुनरावृत्ति हुई।

इस बारे में चौधरी ने कहा कि वे चक्रवात के बाद जमीनी हालात मालूम करने के लिए जिले में आई थीं। गोसाबा पहुंचने के कुछ ही देर बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं के एक समूह ने उनका काफिला रोक दिया और 'गो बैक' के नारे लगाए। सूत्रों के अनुसार प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हस्तक्षेप किया।

बुलबुल प्रभावित क्षेत्रों में राहत को अधीर ने लिखा गृह मंत्री को पत्र

राज्य में बुलबुल प्रभावित क्षेत्रों के हालात जानने व लोगों की मदद को लोकसभा में नेता विपक्ष व बहरामपुर के सांसद अधीर रंजन चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री से एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने का आग्रह किया है। साथ ही गृह मंत्री अमित शाह को लिखे अपने पत्र में उन्होंने बुलबुल प्रभावित क्षेत्र के लोगों की दुर्दशा से भी उन्हें अवगत कराया है।

वहीं, सांसद अधीर रंजन चौधरी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री को लिखे पत्र को लेकर भी सियासत तेज हो गई है और कहा जा रहा है कि अधीर राज्य सरकार के राहत कार्यो से असंतुष्ट है और यही वजह है कि उन्होंने केंद्र सरकार से मदद की अपील की है। हालांकि, बहरामपुर के सांसद ने अपने पत्र में सीधे तो राज्य सरकार पर हमला नहीं किया है, लेकिन जिस तरीके से उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिख उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने की मांग की है, उससे तो यह साफ हो गया कि वे राज्य की ममता सरकार के राहत कार्यो से संतुष्ट नहीं है।

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Posted By: Sachin Mishra

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