रायपुर। छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा मिशन 65 प्लस के लक्ष्य को पाने के लिए 43 सीट पर नये चेहरों को मैदान में उतारने जा रही है। भाजपा के आला पदाधिकारियों की बैठक के बाद यह तय किया गया है कि एंटी इनकम्बेंसी को दूर करने के लिए कमजोर परफार्मेंस वाले 21 विधायकों की टिकट काटी जाएगी। यही नहीं, कोर ग्रुप के फैसले पर अगर केंद्रीय संगठन ने मुहर लगा दी तो तीन मंत्रियों की टिकट भी कट सकती है। भाजपा पहली बार ऐसा करने जा रही है, जिसमें मंत्रियों के टिकट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

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पिछले चुनाव में हार गए थे पांच मंत्री
पिछले विधानसभा चुनाव में पांच मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो उन मंत्रियों के खिलाफ सर्वे रिपोर्ट से लेकर संगठन तक की रिपोर्ट में निगेटिव फीडबैक मिला था। लेकिन सरकार के कामकाज पर सवाल उठने के डर से किसी भी मंत्री का टिकट नहीं काटा गया।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस बार कोई कोर कसर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि ग्रेडिंग में सी ग्रेड पर आये विधायकों और मंत्रियों के टिकट को काटने का फैसला हो सकता है। शाह की टीम ने प्रदेश की सभी 90 विधानसभा में विधायकों और टिकट के दावेदार नेताओं को चार ग्रेडिंग दी है। इसमें ए और बी ग्रेड वाले नेताओं की टिकट लगभग तय है। संकेत मिल रहे हैं कि 49 में से 28 विधायक ए और बी ग्रेड में आए हैं। जबकि 16 विधायक सी और पांच विधायक डी श्रेणी में आए हैं।

पाटन, रायपुर ग्रामीण में भारी रहेगा जातिगत समीकरण
पिछले चुनाव में पाटन और रायपुर ग्रामीण में हारे नेताओं की टिकट पर भी संकट है। बताया जा रहा है कि पार्टी यहां जातिगत समीकरण के आधार पर टिकट देगी, लेकिन पिछले चुनाव में हारे नेताओं की लोकप्रियता का आकलन कर लिया गया है। रायपुर ग्रामीण में साहू समाज के नेता को टिकट के संकेत मिल रहे हैं।

 

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