नई दिल्ली, [बिजेंद्र बंसल]। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पिछले सहित मौजूदा कार्यकाल की हर मुश्किल घड़ी में दिल्ली दरबार पूरी तरह साथ खड़ा रहा। यही कारण है कि न तो पिछले कार्यकाल में मनोहर लाल का अपनी ही पार्टी के विरोधी कुछ बिगाड़ पाए और न ही इस कार्यकाल में उनका बाल भी बांका हो पाएगा। सीआइडी के मामले में गृहमंत्री अनिल विज से खींचतान में जीत के बाद मनोहरलाल की हरियाणा भाजपा में पकड़ बढ़ी है। इसके साथ ही चर्चाएं गर्म हैं कि विज के बादअब सहयोगी दल जननायक जनता पार्टी (JJP) काे झटका देने की तैयारी

पहले कार्यकाल में भी मनोहर के खिलाफ किसी मंत्री को नहीं मिला था दिल्ली दरबार से संरक्षण

पिछले कार्यकाल में मनोहर लाल के सामने पहले रामपाल, फिर जाट आंदोलन तथा डेरा प्रमुख की गिरफ्तारी के बाद हिंसक झड़पों के प्रकरण आए मगर दिल्ली के साथ खड़े रहने के कारण वे बड़ी से बड़ी मुसीबत से बाहर निकलने में कामयाब रहे। दूसरे कार्यकाल में मनोहर लाल को सबसे पहले अपने गृहमंत्री अनिल विज की नाराजगी का सामना करना पड़ा और इस खींचतान में मनोहरलाल की जीत हुई।

सीआइडी प्रमुख को लेकर शुरू हुए इस विवाद में पहले तो मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं कहा, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर आने लगा तो उन्होंने दिल्ली दरबार की शरण ली। सूत्रों की मानें तो सोमवार रात्रि ही मुख्यमंत्री को पार्टी के शीर्ष नेता से यह इशारा मिल चुका था कि एक बार अनिल विज के साथ बैठ लो, यदि फिर भी वे नहीं मानते हैं तो अपने हिसाब से मामला सुलझा दो।

इसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल स्वयं नए राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने दिल्ली आए। अनिल विज से राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से मिलने पहुंचे और पार्टी मुख्यालय से हरियाणा भवन तक अपनी गाड़ी में बैठाकर लाए। इसी बीच मंगलवार सुबह अनिल विज ने पुराना राग मीडिया के समक्ष अलापा तो फिर सीएम ने मामले के पटाक्षेप की ठान ली और बुधवार को देर रात सीआइडी विज से छीनकर अपने पास लिया।  

सबको असलियत बता चुके हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह

पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह पहले भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल की दिल्ली में पकड़ की बाबत कई बार उन नेताओं को बता चुके हैं जो सीएम के खिलाफ उछलकूद करते रहे हैं। बीरेंद्र सिंह के अनुसार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मुलाकात में मुख्यमंत्री मनोहर लाल को सर्वश्रेष्ठ ही नहीं बल्कि अपने जैसा बताया था।

जानकारों का कहना है कि बीरेंद्र सिंह की इस बात का हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के विरोधी 8 सितंबर 2018 से पहले तक विश्वास नहीं करते थे। 8 सितंबर को रोहतक में आयोजित विजय संकल्प रैली के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रैली स्थल से कह दिया था कि जैसे उन्हें लोग नमो कहते हैं, वैसे ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर हैं और नमो व मनोहर में कोई अंतर नहीं है।

सीएमओ में कोई विवाद नहीं चाहते सीएम

मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपने कार्यालय के अधिकारियों को किसी भी विवाद से दूर रखना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने सबसे पहले गृहमंत्री अनिल विज के विवाद से अपने प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और अतिरिक्त प्रधान सचिव वी.उमाशंकर को बाहर निकाला। इसके बाद उन्होंने अपने तीसरे सबसे चहेते अधिकारी सीआइडी प्रमुख अनिल राव को भी गृहमंत्री से दूर कर दिया। पहले सीएम ने गृहमंत्री के साथ खुल्लर को गृह सचिव और विज के शहरी स्थानीय निकाय विभाग में उमाशंकर को प्रधान सचिव लगाया था। मगर अब सीएमओ के तीनों अधिकारियों को विज से दूर कर दिया गया है।

विज को दिल्ली में किसका संरक्षण

गृहमंत्री अनिल विज के अड़ियल रुख के पीछे दिल्ली दरबार से किसका संरक्षण था, यह बात भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। ज्यादातर नेता मानते हैं कि भाजपा में एक लॉबी ऐसी भी है जो अनिल विज को पीछे से संरक्षण दे रही थी। लेकिन, यह लाॅबी भी उस दिन से चुप बैठ गई जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल प्रधानमंत्री के साथ हुई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की परिषद की बैठक से बाहर निकले।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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